अर्जुन बिजलानी ने खोली टीवी की पोल: '8 घंटे की शिफ्ट कल्पना है, कलाकारों को पूरा दिन खटना पड़ता है'

'8 घंटे की शिफ्ट टीवी के लिए संभव नहीं', लंबे वर्किंग आवर्स पर अर्जुन बिजलानी का खुलासा


मुंबई, 5 फरवरी। टीवी की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार और रंगीन दिखाई देती है, अंदर से उतनी ही दबाव से भरी होती है। दर्शक रोज अपने पसंदीदा कलाकारों को टीवी स्क्रीन पर देखते हैं, लेकिन उनकी मेहनत, थकान और मानसिक तनाव से अनजान रहते हैं। घंटों शूटिंग, लगातार काम का दबाव और निजी जीवन के लिए कम समय, ये सब टीवी कलाकारों की रोजमर्रा जिंदगी का हिस्सा है।

इसी मुद्दे पर छोटे पर्दे के जाने-माने अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने आईएएनएस से खुलकर बात की है और बताया है कि टीवी इंडस्ट्री में काम करना कितना कठिन होता है।

अर्जुन बिजलानी ने टीवी इंडस्ट्री के लंबे वर्किंग आवर्स को बेहद मुश्किल बताया। उन्होंने कहा, "कागज पर भले ही 12 घंटे की शिफ्ट लिखी जाती हो, लेकिन असल में कलाकारों का पूरा दिन काम में ही निकल जाता है। शूटिंग के अलावा सेट तक आने-जाने का समय, मेकअप, और कई बार ओवरटाइम भी इसमें जुड़ जाता है, जिससे काम के घंटे और बढ़ जाते हैं।"

अर्जुन ने उदाहरण देते हुए कहा, ''अगर किसी कलाकार की शूटिंग सुबह 9 बजे से शुरू होती है, तो उसे सुबह 7 बजे उठना पड़ता है। 8 बजे तक घर से निकलना जरूरी होता है ताकि समय पर सेट पहुंचा जा सके। खासकर महिला कलाकारों को कई बार और भी जल्दी बुलाया जाता है, क्योंकि उन्हें मेकअप और तैयार होने में ज्यादा समय लगता है। इस वजह से उनका दिन और भी लंबा हो जाता है।''

उन्होंने कहा, ''शूटिंग अक्सर रात 9 बजे तक चलती है और कई बार इससे भी देर हो जाती है। शूट खत्म होने के बाद भी कलाकारों को मेकअप उतारने और कपड़े बदलने में समय लगता है। इसके बाद ट्रैफिक में घर लौटना एक अलग चुनौती होती है। कई बार कलाकार रात के काफी देर से घर पहुंचते हैं, जब शरीर पूरी तरह थक चुका होता है।''

अर्जुन बिजलानी ने कहा, ''सबसे मुश्किल बात यह है कि अगले दिन फिर वही दिनचर्या दोहरानी पड़ती है। शरीर को पूरा आराम मिलने से पहले ही फिर से काम पर निकलना पड़ता है। लगातार ऐसा होने से मानसिक और शारीरिक थकान बढ़ती जाती है, जिसका असर कलाकारों की सेहत पर भी पड़ता है।''

अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अर्जुन ने बताया, "एक समय ऐसा भी था जब तय समय से कहीं ज्यादा काम करना पड़ता था। कभी-कभी ऐसा महसूस होता था जैसे 30 दिनों के महीने में 35 दिन काम किया हो। यह दौर मेरे लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से बेहद थकाने वाला था। लेकिन पहले के मुकाबले अब हालात कुछ बेहतर हुए हैं। पहले शूटिंग 14, 15, और 18 घंटे तक चलती थी। अब ज्यादातर प्रोड्यूसर्स कोशिश करते हैं कि शूट तय 12 घंटे में ही खत्म कर दिया जाए।"

जब आईएएनएस ने उनसे पूछा कि क्या टीवी इंडस्ट्री में 8 घंटे की शिफ्ट होनी चाहिए, तो अर्जुन बिजलानी ने कहा, ''तकनीकी रूप से यह संभव नहीं है। जब कोई शो हफ्ते में सातों दिन टेलीकास्ट होता है, तो इतने कम समय में काम पूरा करना मुश्किल हो जाता है।''

अर्जुन ने कहा, ''अगर काम के घंटे घटाकर 8 कर दिए जाएं, तो शो की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। दर्शकों तक अच्छी क्वालिटी का कंटेंट पहुंचाने के लिए कलाकारों और पूरी टीम को 12 घंटे तक काम करना पड़ता है। काम और सेहत के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।''
 

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