बंगाल मतदाता सूची विवाद: दिलीप घोष बोले- सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी नहीं मानेंगी ममता, जनता तय करेगी

एसआईआर विवाद: भाजपा नेता दिलीप घोष बोले- कोर्ट की कुछ भी राय हो, ममता बनर्जी उसे मानने वाली नहीं


मालदा, 5 फरवरी। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर राजनीति तेज है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नई याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को निशाना साधते हुए कहा कि कोर्ट की राय कुछ भी हो, लेकिन ममता बनर्जी उसे मानने वाली नहीं हैं।

भाजपा नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत में कहा, "मुख्यमंत्री की भाषा के बारे में सब जानते हैं। वह प्रधानमंत्री का अपमान करती हैं, गृह मंत्री का करती हैं। पूर्व पार्टी अध्यक्ष नड्डा जी के बारे में बोलती हैं। उनकी भाषा ही ऐसी है। जो संविधान या कोर्ट को नहीं मानते, उनके बारे में क्या कहें?"

दिलीप घोष ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता तय करेगी कि क्या करना है। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने पहले भी बोला है, लेकिन कोर्ट की कुछ भी राय हो, ममता बनर्जी उसे मानने वाली नहीं हैं। वह जब संकट में पड़ती हैं तब कोर्ट के पास जाती हैं, लेकिन जब दूसरे के लिए कोर्ट बोलता है तो वह उस फैसले को नहीं मानती हैं।"

इसी बीच, भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश होने वाले अंतरिम बजट को ममता बनर्जी सरकार का अंतिम बजट बताया। उन्होंने कहा, "तृणमूल कांग्रेस की सरकार का यह अंतिम बजट है। उन्हें आगे बजट पेश करने का अवसर नहीं मिलेगा।" दिलीप घोष ने यह भी कहा कि इस बजट से भी बंगाल के लोगों को खास उम्मीद नहीं है। वोट के लिए जरूर कुछ घोषणाएं हो सकती हैं।

बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार गुरुवार को अंतरिम बजट पेश करेगी। बजट को लेकर सबकी नजरें लक्ष्मी भंडार, डीए और आशा वर्कर्स की सैलरी से जुड़ी घोषणाओं पर रहेंगी।

'लक्ष्मी भंडार' प्रोजेक्ट 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले एक वादा था। जीतने के बाद ममता बनर्जी ने इसे पूरा किया। राज्य सरकार ने पिछले लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के बीच हिट रहे इस प्रोजेक्ट में पैसे की रकम बढ़ाई थी। अब, इस प्रोजेक्ट में जनरल कैटेगरी की महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए मिलते हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को हर महीने 1,200 रुपए मिलते हैं।

उम्मीद की जा रही है कि ममता बनर्जी इस अंतरिम बजट में महिलाओं का वोट बनाए रखने के लिए लक्ष्मी भंडार की रकम बढ़ा सकती हैं।
 

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