नई दिल्ली, 4 फरवरी। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मंगलवार को आतिशी वीडियो विवाद में पंजाब पुलिस की कार्रवाई को सदन की विशेषाधिकार समिति को विस्तृत जांच के लिए भेज दिया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का मामला बनता है।
दिल्ली कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा दायर शिकायत का संज्ञान लेते हुए गुप्ता ने कहा कि विशेषाधिकार समिति पंजाब के पुलिस महानिदेशक और जालंधर पुलिस आयुक्त की भूमिका की जांच करेगी।
यह मामला 6 जनवरी, 2026 को दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी द्वारा दिए गए बयानों के कथित तौर पर संपादित या छेड़छाड़ किए गए वीडियो क्लिप के संबंध में इकबाल सिंह की शिकायत पर पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
पंजाब पुलिस द्वारा प्रस्तुत जवाब और मिश्रा की शिकायत पर विचार करने के बाद, अध्यक्ष ने निष्कर्ष निकाला कि यह मुद्दा सीधे सदन की कार्यवाही से संबंधित है, जो विधायी विशेषाधिकार के दायरे में आता है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि विधानसभा सचिवालय द्वारा पंजाब पुलिस को यह सूचित किए जाने के बावजूद कि अध्यक्ष और सदन ने मामले का संज्ञान ले लिया है, एफआईआर दर्ज की गई और विधानसभा की कार्यवाही में छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए सार्वजनिक बयान दिए गए।
अध्यक्ष ने पंजाब के डीजीपी और जालंधर पुलिस आयुक्त द्वारा प्रस्तुत लिखित स्पष्टीकरणों को असंतोषजनक बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पंजाब पुलिस ने कानून के अनुसार कार्रवाई की है और कथित कृत्य दिल्ली विधानसभा के बाहर के व्यक्तियों द्वारा किए गए थे।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद, पंजाब पुलिस दिल्ली विधानसभा सचिवालय को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रही, जिनमें शिकायत, एफआईआर, पंजाब पुलिस के सोशल मीडिया विशेषज्ञ की रिपोर्ट और पंजाब फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की फोरेंसिक रिपोर्ट की प्रतियां शामिल हैं।
इसमें आगे कहा गया कि पंजाब एफएसएल निदेशक के साथ पत्राचार से पता चला कि फोरेंसिक रिपोर्ट केवल संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ ही साझा की गई थी।