कांग्रेस विधायक धारीवाल ने राजस्थान विधानसभा में फिर की भाषा की मर्यादा भंग, सदन में बवाल से गरमाई सियासत

राजस्थान: कांग्रेस विधायक ने सदन में फिर किया अपशब्दों का इस्तेमाल, विधानसभा में हुआ विवाद


जयपुर, 4 फरवरी। राजस्थान विधानसभा में बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बेरोजगारी से लेकर आदिवासी अधिकारों तक के मुद्दों पर दोनों पक्ष आमने-सामने आए, जिससे सदन में कई बार हंगामा हुआ और कार्यवाही बाधित होती रही।

राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने युवाओं की बेरोजगारी और कौशल विकास पर बोलते हुए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे सदन में विवाद खड़ा हो गया।

धारीवाल ने कहा कि अगर करोड़ों युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के योग्य नहीं बनाया गया तो बढ़ती युवा आबादी देश के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगी।

सरकार के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने इस पर तंज कसते हुए बिना किसी का नाम लिए कहा, “इस देश में एक युवा को छोड़कर सभी को रोजगार मिल गया है।”

धारीवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें गर्ग की बात का सिर्फ आधा हिस्सा ही समझ में आया। इसी दौरान उन्होंने सदन में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया।

धारीवाल के भाषण के बाद मुख्य सचेतक ने आपत्ति जताते हुए कहा कि अपने पुराने व्यवहार के अनुसार धारीवाल ने एक बार फिर असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है और इसे कार्यवाही से हटाने की मांग की।

इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने आपत्तिजनक टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाने के आदेश दिए। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी शांति धारीवाल ऐसे ही बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं और बाद में सदन से माफी भी मांग चुके हैं।

इसी बहस के दौरान चौरासी से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक अनिल कटारा ने सरकार पर आदिवासी समुदाय की अनदेखी का आरोप लगाया और अलग भील राज्य की मांग उठाई।

कटारा ने आरोप लगाया कि 'डबल इंजन सरकार' के दावों के बावजूद आदिवासी इलाकों के जंगल नष्ट किए जा रहे हैं, जमीन छीनी जा रही है और पहाड़ों में खनन कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भर्तियां आरक्षण नियमों के अनुसार नहीं की जा रही हैं।

कटारा ने कहा, “अगर आदिवासी समाज का लगातार अपमान किया गया और उसकी अनदेखी होती रही, तो अलग भील राज्य की मांग ही हमारे पास एकमात्र रास्ता बचेगा।” उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सड़क से लेकर विधानसभा तक चलाया जाएगा।

कांग्रेस विधायक रमिला खड़िया ने भी बहस के दौरान तीखी टिप्पणियां करते हुए आदिवासी क्षेत्र विकास (टीएडी) मंत्री पर मनमाने फैसले लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समन्वयकों को बिना सूचना हटाया गया और अदालत के हस्तक्षेप के बाद भी उन्हें बहाल नहीं किया गया।

खड़िया ने मंत्री पर नियुक्तियों में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि रिश्तेदारों के दबाव में टीएसपी क्षेत्र के बाहर के लोगों को आदिवासी इलाकों में नियुक्त किया गया। उन्होंने शिक्षकों के वेतन में देरी और आंगनवाड़ी केंद्रों में दिए जा रहे पोषण आहार की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएडी मंत्री ने कहा कि खड़िया की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जो उठाए गए मुद्दों की जांच करेगी।

इससे पहले दिन में प्रश्नकाल और शून्यकाल के दौरान भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा की भी बेघर परिवारों और प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े सवालों पर विपक्षी सदस्यों से तीखी बहस हुई। लगातार हंगामे और व्यवधान के कारण विधानसभा की कार्यवाही अंततः गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
 
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