लखनऊ, 4 फरवरी। उत्तर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में योगी सरकार के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। इसका असर राज्य पक्षी सारस की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आया है। प्रदेश में कराई गई शीतकालीन राज्यव्यापी गणना में कुल 20,628 सारस दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
वन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष दो बार, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन सारस की गणना कराई जाती है। इस वर्ष शीतकालीन गणना प्रदेश के 68 वन प्रभागों में की गई, जिसमें इटावा वन प्रभाग में सर्वाधिक 3,304 सारस पाए गए। प्रदेश के 10 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 500 से अधिक दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वन्यजीव संरक्षण के लिए चलाए जा रहे अभियानों का परिणाम है कि सारस की संख्या वर्ष दर वर्ष बढ़ रही है। वर्ष 2023 में प्रदेश में 19,196 सारस मिले थे, जो 2024 में बढ़कर 19,994 हो गए। अब शीतकालीन गणना में यह संख्या 20,628 तक पहुंच गई है।
शीतकालीन गणना के दौरान इटावा के बाद मैनपुरी में 2,899, औरैया में 1,283, शाहजहांपुर में 1,078, गोरखपुर में 950, कन्नौज में 826, कानपुर देहात में 777, हरदोई में 752, सिद्धार्थनगर में 736 और संतकबीर नगर में 701 सारस पाए गए।
इसके अलावा 29 वन प्रभागों में सारसों की संख्या 100 से 500 के बीच रही, जबकि 29 वन प्रभागों में 100 से कम सारस दर्ज किए गए।
शीतकालीन गणना कार्यक्रम में प्रदेश भर से लगभग 10 हजार नागरिकों ने सहभागिता की, जिससे जनसहभागिता के साथ संरक्षण अभियान को मजबूती मिली। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) अनुराधा वेमुरी ने बताया कि गणना से पूर्व वन विभाग द्वारा सारस बाहुल्य प्राकृतिक आवासों का सर्वे कर महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई थी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार वन विभाग वन्यजीव संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है, जिसका सकारात्मक परिणाम सारसों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है।