निरुपम का कांग्रेस पर वार: संसद में हंगामा कर राहुल गांधी ने सेना के सम्मान से किया खिलवाड़

संजय निरुपम का कांग्रेस पर निशाना, पार्टी संसद बाधित कर रही, सेना के सम्मान से कर रही खिलवाड़


मुंबई, 4 फरवरी। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कांग्रेस और उसके सांसदों पर संसद की कार्यवाही को बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कांग्रेस सांसदों को न तो संसद सत्र को सुचारु रूप से चलाने में रुचि है और न ही बजट को सही तरीके से पारित करने या देश के लिए जरूरी मुद्दों पर शांति और गंभीरता से चर्चा करने में।

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि जिस तरह से राहुल गांधी ने लोकसभा में पूर्व आर्मी चीफ जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अभी तक प्रकाशित न हुई किताब के कुछ अंशों को उद्धृत करने की कोशिश की, वह पूरी तरह गलत है और इसे किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। मनोज मुकुंद नरवणे कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि देश के सेनाध्यक्ष थे और उनकी बातों को इस तरह कोट करना सीधे तौर पर देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विषय बन जाता है।

संजय निरुपम ने जोर देकर कहा कि देश की सुरक्षा और सेना के जवानों का सम्मान सर्वोपरि है। अगर विपक्ष को किसी मुद्दे पर आपत्ति है या कुछ गलत लगता है तो उस पर चर्चा करना उनका अधिकार है, लेकिन भारत की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करके नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी जिस तरह से व्यवहार कर रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि वे खुलकर सेना का अपमान करने पर उतर आए हैं। इसी कारण लोकसभा स्पीकर ने संबंधित सांसदों को निलंबित किया है और इस फैसले को देशहित में स्वीकार किया जाना चाहिए तथा उसका सम्मान होना चाहिए।

उन्होंने बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी के एसआईआर के विरोध करने और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर तंज कसा। उन्‍होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया का विरोध कर रही हैं, ठीक उसी तरह जैसे बिहार में इस प्रक्रिया के पायलट प्रोजेक्ट के दौरान विपक्षी नेताओं ने किया था। उन्होंने दावा किया कि बिहार में इस प्रक्रिया के जरिए 67 लाख गैर-कानूनी वोटरों को सूची से हटाया गया और एक भी व्यक्ति सामने आकर यह साबित नहीं कर सका कि वह असली वोटर या भारतीय नागरिक है। अब यही प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में लागू हो रही है, जिससे सीएम ममता बनर्जी परेशान नजर आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी घबराहट की वजह यह है कि बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठिए, जो भारत के अवैध नागरिक हैं, वोटर बन चुके हैं।

संजय निरुपम ने कहा कि ऐसे अवैध लोगों को हटाने के खिलाफ ममता बनर्जी का सुप्रीम कोर्ट जाना एक तरह का राजनीतिक ड्रामा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कोई भी न्याय की मांग कर सकता है, लेकिन जब वास्तव में अन्याय हुआ हो। उनका मानना है कि इस मुद्दे पर सीएम ममता बनर्जी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा और यह चुनाव उनके राजनीतिक करियर का आखिरी चुनाव भी साबित हो सकता है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर भी कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। संजय निरुपम ने कहा कि संसद के प्रवेश द्वार पर धरने के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार’ कहना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने सवाल किया कि अगर कोई व्यक्ति पार्टी की गलत नीतियों और विचारधारा से असहमति जताकर अलग रास्ता चुनता है तो क्या वह गद्दार हो जाता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी से इस तरह के मानसिक दिवालियापन की उम्मीद नहीं थी। संसद के भीतर और बाहर उनके व्यवहार पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और लोगों ने उन्हें गंभीर होने की सलाह दी है, लेकिन आज उन्होंने अपने हल्के व्यक्तित्व की चरम सीमा दिखा दी है। संजय निरुपम ने मांग की कि राहुल गांधी को रवनीत सिंह बिट्टू से माफी मांगनी चाहिए।

एनसीपी के संभावित विलय के सवाल पर शिवसेना नेता ने कहा कि यह पूरी तरह से एनसीपी का आंतरिक मामला है और इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। हालांकि, उन्होंने इसे चौंकाने वाला बताया कि शरद पवार की पार्टी की ओर से ही लगातार विलय का मुद्दा उछाला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शरद पवार की पार्टी इतनी कमजोर हो गई है कि उसे अजित पवार की पार्टी के साथ विलय की संजीवनी तलाशनी पड़ रही है। संजय निरुपम ने कहा कि शरद पवार महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक नेता माने जाते हैं, ऐसे में अगर वे खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं और अपने भतीजे के सहारे राजनीति को दोबारा खड़ा करने का सपना देख रहे हैं, तो यह बेहद शर्मनाक और हास्यास्पद है।
 

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