रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ का कबूलनामा: आजादी के लिए लड़ रहे बलूच विद्रोहियों के सामने पाकिस्तानी सेना कमजोर

बलूच विद्रोहियों के सामने कमजोर थी पाकिस्तानी सेना: रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ


क्वेटा, 4 फरवरी। हाल ही में पाकिस्तानी सेना और बलूच विद्रोहियों के बीच झड़प हुई, जिसमें दोनों तरफ से कई जानें गईं। मामले में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने माना है कि बलूचिस्तान में आतंकवादी हिंसा में नई बढ़ोतरी के बीच देश के सुरक्षा बल बलूच विद्रोहियों के खिलाफ कमजोर पड़ गए हैं।

बलूचिस्तान प्रांत इस्लामाबाद से आजादी के लिए लड़ रहा है। पिछले तीन दिनों में बलूचिस्तान में चल रहे काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन में बलूच विद्रोही और दूसरे हथियारबंद समूह के उग्रवादियों समेत कुल 197 लोग मारे गए। सरकारी मीडिया ने मंगलवार को बताया कि सुरक्षाबल के 22 लोग भी मारे गए।

पाकिस्तानी सरकार ने इस समूह का नाम 'फितना अल-हिंदुस्तान' रखा है, ताकि बलूच विद्रोहियों का जबरन भारत के साथ कनेक्शन जोड़ा जा सके।

इस मामले पर नेशनल असेंबली (एनए) में ख्वाजा आसिफ ने कहा, "बलूचिस्तान भौगोलिक दृष्टिकोण से पाकिस्तान का 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सा है। इसे कंट्रोल करना किसी आबादी वाले शहर या इलाके से कहीं ज्यादा मुश्किल है। इसके लिए भारी फोर्स की जरूरत है। हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और उनके (आतंकियों) खिलाफ एक्शन में हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की रखवाली और पेट्रोलिंग करने में वे शारीरिक तौर पर कमजोर हैं।"

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए आसिफ ने देश के सबसे बड़े लेकिन सबसे कम आबादी वाले प्रांत में सैनिकों के सामने आने वाली भौगोलिक चुनौतियों के बारे में बताया, जब अलगाववादी ताकतों ने कम से कम 12 जगहों पर मिलकर हमले किए।

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने कहा है कि पूरे प्रांत में चलाए गए बड़े पैमाने पर काउंटर टेरर ऑपरेशन में कम से कम 177 विद्रोही मारे गए।

ख्वाजा आसिफ ने विद्रोही समूह बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। बता दें, बीएलए ने ही इस हमले की जिम्मेदारी ली है। पाक रक्षामंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चों समेत आम लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों के साथ कोई बातचीत नहीं की जाएगी।

उन्होंने दावा किया कि अपराधी और अलगाववादी समूहों के बीच एक सांठगांठ है, जिसमें अपराधी गैंग बीएलए के बैनर तले काम करते हैं, जो उनके अनुसार स्मगलर्स को बचाता है।

उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में कबायली बुजुर्गों, ब्यूरोक्रेसी और अलगाववादी आंदोलन चलाने वालों ने एक सांठगांठ बना ली है और दावा किया कि स्मगलर्स पहले तेल की स्मगलिंग से एक दिन में 4 बिलियन पाकिस्तानी रुपए तक कमाते थे।

यह तब हुआ जब बलूच लोगों के खिलाफ सुरक्षाबलों द्वारा मानवाधिकार के उल्लंघन में बढ़ोतरी के बीच वे पाकिस्तान से अलग होने के लिए लड़ रहे हैं। बलूचिस्तान में लोगों को जबरदस्ती गायब करने, न्यायेतर हत्या और नकली आरोपों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्मगलिंग रोकने के लिए सख्ती की है, जिससे चमन बॉर्डर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। कुछ लोग कहते हैं कि सरकार को राष्ट्रवादी आंदोलनों से बातचीत करनी चाहिए, लेकिन उन्होंने दावा किया कि विरोध व्यावसायिक हितों से प्रेरित था।

इस बीच बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने इस ऑपरेशन को इतने कम समय में की गई सबसे बड़ी इंटेलिजेंस-लीड कार्रवाई में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई बीएलए द्वारा किए गए कई हमलों के बाद की गई।

ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगे बलूचिस्तान में दशकों से बलूच अलगाववादियों के नेतृत्व में विद्रोह चल रहा है, जो ज्यादा ऑटोनॉमी और प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों में बड़ा हिस्सा चाहते हैं।

कलात रियासत के एकीकरण के तुरंत बाद पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ बलूच विरोध शुरू हो गया था। 1948, 1958–59, 1962–63, 1973–77 और 2000 के दशक की शुरुआत से लेकर अब तक विद्रोह देखे गए। यह प्रांत मिनरल, नैचुरल गैस, कोयला, कॉपर, सोना और ग्वादर जैसे स्ट्रेटेजिक पोर्ट से भरपूर है। इसके बावजूद, बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत बना हुआ है, जहां सड़कें, हॉस्पिटल, स्कूल, बिजली और रोजगार के मौके कम हैं।
 
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