नई दिल्ली, 4 फरवरी। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोके जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, देश के हर नागरिक की इस पर आस्था है। इसलिए हमें इसके अंदर जरूरी मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए।
लोकसभा में भारत-चीन गतिरोध पर राहुल गांधी की ओर से पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब का हवाला दिए जाने पर मचे हंगामे को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "राहुल गांधी एक पब्लिक सोर्स से कोट कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष के लोग खुद कभी मैग्जीन तो कभी किताब से संसद में कोट करते रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "संसद में हमेशा ही चीन, पाकिस्तान और विदेश नीति से जुड़े जरूरी मामलों पर चर्चा होती रही है। यही हमारी परंपरा रही है। विपक्ष हो या सरकार, सभी ने खुलकर अपना पक्ष रखा है। असलियत में सरकार डर गई है कि उनकी सच्चाई देश के सामने आ जाएगी, इसलिए वे किताब को पब्लिश भी नहीं होने दे रहे हैं।"
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह सिर्फ विपक्ष के नेता को बोलने न देने का मामला नहीं है। यह लोकतंत्र और संसद के काम करने के तरीके का एक बुनियादी मुद्दा है। अगर कोई अपना पक्ष रख रहा है, तो उसमें क्या दिक्कत है? वे डर रहे हैं कि क्या बातें सामने आने वाली हैं। किताब में ऐसी चीजें लिखी हैं जो दिखाती हैं कि संकट के समय में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और हमारे शीर्ष नेतृत्व की क्या प्रतिक्रिया रही। यह उनकी सरकार के चरित्र को दिखाता है कि जब देश पर हमला हो रहा है और चीनी सैनिक हमारी सीमा पर आ रहे हैं, तो वे कैसे प्रतिक्रिया दे रहे हैं।"
संसद के 8 विपक्षी सदस्यों के सस्पेंशन पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि हर सत्र में विपक्ष के सांसदों को सस्पेंड किया जा रहा है, इसमें कोई नई बात नहीं रह गई है।
उज्ज्वल रमन सिंह ने सांसदों के निलंबन को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा इस तरह की नजीर पेश करती रही है। सरकार की जिम्मेदारी है कि संसद चले। उन्होंने कहा कि संसद ऐसी जगह है, जहां विचारों का खुलकर आदान-प्रदान होता है, लेकिन भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है। सरकार खुद अपनी जिम्मेदारी से भागती है। सत्ता में बैठे लोग सदन के अंदर संवाद नहीं करना चाहते हैं। नेता प्रतिपक्ष को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जाता है।
उन्होंने कहा, "बात पर्चियां उछालने की नहीं है, बात यह है कि आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। सरकार देश का पैसा बर्बाद करा रही है। वह चाहती है कि देश में कोई चर्चा न की जाए।"