भुवनेश्वर, 3 फरवरी। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने मंगलवार को प्रमुख 'मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना' का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह योजना केवल एक सामान्य जन कल्याण योजना नहीं है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा लोगों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने का एक अनूठा प्रयास है।
इस योजना का शुभारंभ गंजाम स्थित प्रसिद्ध मां तारा तारिणी मंदिर परिसर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान किया गया, जहां सामूहिक विवाह समारोह में 201 जोड़ों ने विवाह बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री मांझी स्वयं समारोह में उपस्थित रहे, उन्होंने कन्यादान की रस्म स्वयं निभाई और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य एक ऐसा ओडिशा बनाना है जहां आर्थिक तंगी या सामाजिक दबाव के कारण किसी भी लड़की को विवाह की कानूनी उम्र से पहले शादी करने के लिए मजबूर न होना पड़े। यह योजना समाज को एक नया संदेश भी देगी कि बेटियां अपने माता-पिता पर बोझ नहीं हैं। वे ईश्वर का आशीर्वाद हैं।
यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि इस योजना के तहत, दुल्हन की आयु 18 से 35 वर्ष और दूल्हे की आयु 21 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। केवल ओडिशा के स्थायी निवासी ही इस योजना का लाभ उठाने के पात्र हैं।
राज्य सरकार पात्र दुल्हनों को 60,000 रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इस राशि में से 45,000 रुपए सीधे दुल्हन के बैंक खाते में हस्तांतरित किए जाएंगे, जबकि शेष 15,000 रुपए विवाह संबंधी खर्चों पर खर्च किए जाएंगे।
इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, विशेषकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को मजबूत वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि बेटियों का विवाह माता-पिता पर आर्थिक बोझ न बने।
मुख्यमंत्री मांझी ने इस अवसर पर कहा कि यह योजना मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विवाह संबंधी आर्थिक बोझ को कम करेगी। यह महिलाओं की गरिमा और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, विधवा पुनर्विवाह को प्रोत्साहित करने और दहेज प्रथा को समाप्त करने में भी महत्वपूर्ण रूप से सहायक होगी।
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रमुख कल्याणकारी योजना 2025-26 से 2029-30 वित्तीय वर्षों के दौरान राज्य के सभी जिलों में लागू की जाएगी, जिसके लिए 59 करोड़ रुपए से अधिक का बजट आवंटित किया गया है।