नई दिल्ली, 3 फरवरी। चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने मंगलवार को अमेरिका के साथ संभावित कृषि व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
यहां मीडिया से बात करते हुए तिवारी ने कहा कि अमेरिका से आ रहे बयानों से संकेत मिलता है कि भारत का कृषि बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुल रहा है, जिससे देश के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी कृषि सचिव ब्रुक एल. रोलिंस ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि भारत का बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुल गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे बयान किसानों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं।
तेवारी ने कहा कि यह कृषि क्षेत्र के लिए बेहद गंभीर मुद्दा है। अगर अमेरिकी कृषि सचिव का दावा है कि भारत का बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुल गया है, तो सरकार को देश के सामने पूरी सच्चाई पेश करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने इस मांग को लेकर संसद में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है और इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा आवश्यक है ताकि देश को पता चल सके कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई बातचीत में वास्तव में क्या निर्णय लिए गए थे।
उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी चर्चा के सभी तथ्य और शर्तें सदन के समक्ष रखी जानी चाहिए। खुली बहस होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
किसानों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा कि अमेरिकी कृषि सचिव और राष्ट्रपति ट्रंप के बयानों से आशंकाएं बढ़ रही हैं कि यदि कोई कृषि व्यापार समझौता अंतिम रूप दिया जाता है, तो इसका देश के कृषि क्षेत्र पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और सरकार को इस पूरे मामले पर पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।