भदोही की बुनावट को 'अमेरिकी' उड़ान, टैरिफ में भारी कटौती से कालीन निर्यात में उछाल के आसार

भदोही की बुनावट को मिली 'अमेरिकी' उड़ान, टैरिफ में भारी कटौती से कालीन निर्यात में उछाल के आसार


भदोही, 3 फरवरी। अमेरिका द्वारा भारतीय कालीनों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क (टैरिफ) को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने के फैसले से उत्‍तर प्रदेश में भदोही के कालीन निर्यातकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस निर्णय से न केवल निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है, बल्कि वैश्विक बाजार में पाकिस्तान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की स्थिति भी मजबूत हुई है।

भारत हर साल दुनिया भर में लगभग 17 हजार करोड़ रुपए के कालीनों का निर्यात करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार का है। कुल निर्यात का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले अमेरिका में खपता है। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण भारतीय कालीन अमेरिकी खरीदारों के लिए महंगे पड़ रहे थे, जिसका सीधा फायदा पड़ोसी देशों को मिल रहा था।

कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के डायरेक्टर और भदोही के प्रमुख निर्यातक इम्तियाज अहमद ने इस फैसले को उद्योग के लिए ‘संजीवनी’ बताया।

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन हो गई थी। भारी टैरिफ हमारे लिए बड़ी बाधा बना हुआ था। अब 18 प्रतिशत टैरिफ होने से हमारी लागत कम होगी और हम वैश्विक मंच पर बेहतर गुणवत्ता के साथ अपनी पकड़ दोबारा मजबूत कर पाएंगे।”

उन्‍होंने कहा कि उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती से अमेरिकी बाजार में भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की मांग में तेजी आएगी। अब तक ऊंचे कर के कारण अमेरिकी खरीदार सस्ते विकल्पों के तौर पर चीन और पाकिस्तान का रुख कर रहे थे। कीमतों में कमी आने से भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी के बुनकरों को बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ घटने का सीधा फायदा निर्यातकों की लागत में कमी और ऑर्डर बुक में बढ़ोतरी के रूप में सामने आएगा, जिससे कालीन उद्योग को नई मजबूती मिलेगी।
 

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