नई दिल्ली, 3 फरवरी। लोकसभा से आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने राहुल गांधी समेत विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें सदन की कार्यवाही बाधित कराने में खुशी मिलती है।
नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि यह मेरी समझ से बाहर है कि आप विपक्ष के नेता हैं। कितनी बार और किन शब्दों या भाषा में यह समझाने की जरूरत है कि एक बार जब चेयर ने कोई फैसला सुना दिया है, तो उसका पालन किया जाना चाहिए। अगर आप नियमों और संसदीय परंपराओं का पालन नहीं करते, तो आप किस तरह के लोकतंत्र की उम्मीद कर रहे हैं। सदन के अंदर मर्यादा की सारी हदें पार कर दी गईं। बस चेयर पर पैर रखना ही बाकी रह गया था। जिस तरह से विपक्षी सांसदों, खासकर कांग्रेस सांसदों ने व्यवहार किया, वह यह दिखाता है कि ऐसी कोई संसदीय नियम या परंपरा नहीं थी, जिसका उन्होंने उल्लंघन न किया हो। चिराग पासवान ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा अपने नियमों से चलते हैं।
चिराग पासवान ने कहा कि कांग्रेस ने सदन को बाधित करने के लिए हर सत्र से पहले कोई न कोई बहाना तलाश लिया होता है। उन्हें सदन की कार्यवाही बाधित करने में खुशी मिलती है। वे रोज नया बहाना ढूंढते हैं। राहुल गांधी ने सोमवार को अपनी बात रखी थी, तो उसे आज दोहराने की क्या जरूरत थी। राहुल गांधी के पास सरकार को घेरने का कोई ठोस मुद्दा नहीं है। कोई एजेंडा नहीं है। मनगढ़ंत बातें लाकर हंगामा करना ही विपक्ष का उद्देश्य बन गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्ष मर्यादा को इतना न गिराए कि सदन की परंपराएं ही खत्म हो जाएं। विपक्ष का यह व्यवहार अशोभनीय और निंदनीय है। जिस तरह से हंगामा किया जा रहा है, उससे लगता है कि उनकी मंशा ही नहीं है कि सदन चले। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के पास अपनी बात रखने का मौका होता है।
चिराग पासवान ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखनी थी तो वे एसआईआर के संबंध में रख सकते थे। लेकिन राहुल गांधी की वजह से बाकी दलों का समय भी व्यर्थ चला गया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज कौन दबा रहा है। कल लोकसभा स्पीकर ने बार-बार अपील की कि इस मुद्दे पर नियमों के अनुसार चर्चा की जाए। क्या विपक्ष के नेता के पास इसके अलावा कोई और मुद्दा नहीं था। इससे साफ पता चलता है कि विपक्ष के पास हंगामा करने के सिवा कुछ नहीं है। आपके सांसद सवाल पूछना चाहते हैं, सरकार जवाब देने के लिए तैयार है। लेकिन आप तो प्रश्नकाल भी नहीं चलने देना चाहते।