लखनऊ, 3 फरवरी। विश्व कैंसर दिवस से पूर्व मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने उपचाररत कैंसर मरीजों के लिए विशेष ‘लखनऊ दर्शन’ आयोजित किया। इस पहल के तहत 30 कैंसर मरीजों ने डबल डेकर इलेक्ट्रिक बस से राजधानी की विरासत, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास का साक्षात्कार किया।
उपचार के कठिन दौर से गुजर रहे कैंसर मरीजों के चेहरे पर मुस्कान और मन में उम्मीद जगाने के उद्देश्य से यूपीएसटीडीसी की ओर से सोमवार को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक विशेष ‘लखनऊ दर्शन’ टूर आयोजित किया गया।
यह भ्रमण लखनऊ दर्शन की नियमित सेवाओं से अलग, विशेष रूप से मरीजों के लिए समर्पित रहा। विभिन्न आयु वर्ग के मरीजों के साथ डॉक्टरों और सहयोगी मेडिकल स्टाफ की मौजूदगी में आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य अस्पताल की दिनचर्या से कुछ समय के लिए राहत देना और मरीजों को खुले वातावरण में शहर की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा। भ्रमण के दौरान यात्रियों के चेहरों पर सुकून, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा साफ झलकती नजर आई।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि यह आयोजन महज एक पर्यटन कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से जुड़ा प्रयास है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अस्पतालों में उपचाररत कैंसर मरीजों को शहर की सांस्कृतिक धरोहर से जोड़कर उनका मनोबल बढ़ाना इस पहल का मूल उद्देश्य है। यह संदेश देता है कि पर्यटन केवल भ्रमण नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी सशक्त माध्यम है। भविष्य में भी उत्तर प्रदेश पर्यटन ऐसी संवेदनशील और समावेशी पहलों को आगे बढ़ाएगा।
भ्रमण में शामिल मरीजों ने इस पहल को यादगार बताया। मरीज रजनी वर्मा ने कहा कि अस्पताल के कमरे से बाहर निकलकर शहर को देखना उनके लिए बेहद खास अनुभव रहा, खासकर विधानसभा को भीतर से देखना जीवनभर याद रहेगा।
वहीं, मरीज अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि बीमारी के चलते यात्रा संभव नहीं हो पा रही थी, लेकिन इस टूर ने उन्हें फिर से खुशी और सकारात्मकता का एहसास कराया। मरीजों के साथ मौजूद डॉ अभिषेक ने बताया कि यात्रा के दौरान मरीज उत्साहित और प्रसन्न नजर आए। ऐसे अनुभव मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं।
मरीजों की सेहत को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों की सलाह के अनुसार बस में हल्का एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया। भ्रमण के अंत में सभी यात्रियों को स्मृति चिह्न भी भेंट किए गए।