जयपुर, 3 फरवरी। बदलते समय और करियर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए, राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग करियर गाइडेंस को एक बार की फॉर्मल एक्टिविटी से बदलने जा रही है।
इस पहल का मकसद राज्य के गाइडेंस सिस्टम को एक स्ट्रक्चर्ड और टिकाऊ तरीके से मजबूत करके स्कूली छात्रों को सोच-समझकर और आत्मविश्वास से करियर चुनने के लिए सशक्त बनाना है।
वोकेशनल एजुकेशन के डिप्टी डायरेक्टर दलचंद गुप्ता ने कहा, "आज बच्चों के पास ऑप्शन की कोई कमी नहीं है। उन्हें सही गाइडेंस की जरूरत है, जो मौजूदा हालात के हिसाब से हो, ताकि वे तय कर सकें कि उनके लिए कौन सा ऑप्शन सबसे अच्छा है।"
नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (एनईपी) 2020 के विजन के साथ, डिपार्टमेंट 'सिर्फ करियर चुनने नहीं, बल्कि करियर जीने' के विचार पर फोकस कर रहा है।
इस अप्रोच के तहत, पूरे राज्य में व्यापक करियर गाइडेंस को संस्थागत बनाने के लिए एक साफ तीन साल का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
यह रोडमैप राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद (समग्र शिक्षा अभियान), जयपुर, और राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (आरएससीईआरटी), उदयपुर, द्वारा यूएनआईसीईएफ राजस्थान और अंतरंग फाउंडेशन के टेक्निकल सपोर्ट से मिलकर तैयार किया जा रहा है।
इस पहल के तहत, छात्रों को उनकी रुचियों, योग्यता और क्षमताओं के आधार पर अपने करियर के रास्ते खुद मैप करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्कूल लेवल पर करियर काउंसलर्स की भूमिका को मजबूत और ज्यादा असरदार बनाया जाएगा। करियर गाइडेंस हाइब्रिड लर्निंग मॉड्यूल, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रैक्टिकल अनुभव के जरिए दिया जाएगा, जो क्लासरूम की सीमाओं से कहीं आगे तक जाएगा।
डिपार्टमेंट शिक्षकों, माता-पिता, छात्रों और इंडस्ट्री के बीच तालमेल बढ़ाकर एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने पर भी काम कर रहा है। मकसद सिर्फ छात्रों को रोजगार के लायक बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें जीवन के हर स्टेज पर जरूरी फैसले लेने के स्किल्स से भी लैस करना है।
इस रणनीति को बनाने के लिए व्यापक करियर मार्गदर्शन पर फोकस करते हुए एक राज्य-स्तरीय वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें छात्र-अनुकूल कम्युनिकेशन और आत्मविश्वास बढ़ाने पर खास जोर दिया गया।
वर्कशॉप की अध्यक्षता करते हुए एडिशनल स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर (सेकंड) अशोक कुमार मीणा ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों को अपना करियर खुद चुनना चाहिए ताकि वे अपनी रुचियों और ताकतों के हिसाब से आगे बढ़ सकें।