कर्नाटक: आबकारी विभाग में 'रिश्वतखोरी-महाघोटाला', भाजपा ने मंत्री थिम्मापुर का इस्तीफा मांगा, ऑडियो रिकॉर्डिंग का दिया हवाला

कर्नाटक भाजपा ने आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप में मंत्री थिम्मापुर के इस्तीफे की मांग की


बेंगलुरु, 3 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई ने मंगलवार को आबकारी विभाग में रिश्वतखोरी, तबादलों के रैकेट और व्यापक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। इस संबंध में भाजपा ने आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर के इस्तीफे की मांग की।

विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, "आबकारी विभाग में लाइसेंस जारी करने और तबादलों में मदद के लिए रिश्वत ली जा रही है। इससे संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की गई हैं और लोकायुक्त के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। इसलिए, आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।"

अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य का आबकारी विभाग भ्रष्टाचार में सबसे आगे है। वीबी-जी राम जी योजना का विरोध कर रहे कांग्रेस नेता महात्मा गांधी के आदर्शों की बात कर रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस स्वयं गांधीजी के आदर्शों का पालन नहीं कर रही है।

अशोक ने कहा, "सरकारी अधिकारियों के व्हाट्सएप संदेश में आधिकारिक तौर पर निर्देश दिया गया है कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री हुबली में आवास विभाग के एक कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं, इसलिए अधिक लोग आएंगे, इसलिए शराब की दुकानों में पर्याप्त मात्रा में शराब का स्टॉक करके उसे बेचा जाना चाहिए। इससे घर बर्बाद हो रहे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाने की बात करते हैं। लोगों को शराब पीने के लिए कहना उनकी संवेदनशीलता की पहचान है।"

उन्होंने कहा, "मंत्री इसलिए चुप हैं क्योंकि मासिक शुल्क आबकारी विभाग में चल रहे घोटाले में शामिल अधिकारियों से आता है। शराब विक्रेता संघ के अध्यक्ष गुरुस्वामी ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि वे अनियमितताओं के बारे में राहुल गांधी से शिकायत करेंगे।"

उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि गुरुस्वामी ने बताया है कि 2,000 शराब की दुकानों को अनुमति दी गई है और 50 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक की रिश्वत ली गई है। हर महीने की 10 तारीख तक रिश्वत न देने पर दुकान मालिकों को परेशान किया जाता है। गुरुस्वामी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के वरुणा निर्वाचन क्षेत्र से ही हैं। गुरुस्वामी की शिकायत के बावजूद सिद्धारमैया ने कोई मदद नहीं की। सिद्धारमैया अब मजबूत मुख्यमंत्री नहीं रहे।

अशोक ने आरोप लगाते हुए कहा, "आबकारी विभाग घोटाले से संबंधित एक ऑडियो सामने आया है। इसमें आबकारी मंत्री आरबी थिम्मापुर और उनके बेटे पर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, मंत्री का कहना है कि यह ऑडियो उन्होंने नहीं बनाया है। कुल मिलाकर, शराब की आपूर्ति करने वाली 14,229 दुकानें हैं। लेकिन राज्य में इतने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं हैं। प्रत्येक दुकान से हर महीने 15,000 से 20,000 रुपए की रिश्वत ली जाती है। इसका मतलब है कि औसतन 21 करोड़ रुपए प्रति माह और 252 करोड़ रुपए प्रति वर्ष लिए जाते हैं।"

उन्‍होंने दावा किया कि आबकारी विभाग में तबादलों के लिए धनराशि तय है। उपायुक्तों के तबादलों के लिए 2.5 से 3.5 करोड़ रुपए, अधीक्षकों के लिए 25 से 30 लाख रुपए, उप अधीक्षकों के लिए 30 से 40 लाख रुपए, आबकारी निरीक्षकों के लिए 40 से 50 लाख रुपए और कांस्टेबलों के लिए 5 से 8 लाख रुपए का भुगतान करना पड़ता है।

उन्होंने कहा, "जब नागेश भाजपा सरकार में मंत्री थे, तब उन पर तबादलों के लिए रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। जब केएस ईश्वरप्पा पर आरोप लगे, तब उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया। हालांकि, इतनी रिश्वतखोरी का पर्दाफाश होने के बावजूद मंत्री थिम्मापुर ने इस्तीफा नहीं दिया है।"
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
3,494
Messages
3,526
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top