कोलकाता, 3 फरवरी। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित कार्यालय और आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान कथित हस्तक्षेप को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया हलफनामा उनके पहले दिए गए बयानों से पूरी तरह विरोधाभासी है।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 8 जनवरी, जिस दिन छापेमारी हुई थी, उस दिन जो बयान दिए थे, वे अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में किए गए दावों से मेल नहीं खाते।
मीडिया से बातचीत में अधिकारी ने कहा, “मुख्यमंत्री लगातार इस मुद्दे पर असत्य बयान देती रही हैं और अब वह अपने ही विरोधाभासी बयानों के जाल में फंस गई हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में उन्होंने कहा है कि ईडी अधिकारियों की अनुमति लेकर वह दोनों जगहों से कुछ फाइलें अपने साथ ले गईं। लेकिन छापेमारी के दिन कैमरे के सामने उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने सब कुछ अपने कब्जे में ले लिया है और ईडी अधिकारियों को कुछ भी ले जाने नहीं दिया। यह उस दिन का उनका सार्वजनिक ऐलान था, जो उनके हलफनामे के दावों से पूरी तरह उलट है।”
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री खुद को जेल जाने के डर से बार-बार अपने ही बयानों का खंडन कर रही हैं।
उन्होंने कहा, “हलफनामे में किए गए दावों और 8 जनवरी को कैमरे पर दिए गए बयानों को देखकर कोई बच्चा भी समझ सकता है कि मुख्यमंत्री खुद ही खुद का विरोध कर रही हैं।”
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले की सुनवाई 10 फरवरी तक के लिए टाल दी।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह निर्णय उस समय लिया, जब प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार द्वारा दायर जवाबी हलफनामे पर प्रतिक्रिया दाखिल करने के लिए समय मांगा।
तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार का जवाब उन्हें मंगलवार को ही प्राप्त हुआ है और केंद्रीय एजेंसी को इसका अध्ययन कर प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए समय चाहिए।
पीठ ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी के लिए तय कर दी।