अमरावती, 3 फरवरी। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने आबकारी विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राज्यभर में शराब की दुकानों पर लगातार निगरानी रखें और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से ज्यादा कीमत पर शराब बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
उपमुख्यमंत्री को राज्य के विभिन्न हिस्सों से शिकायतें मिली हैं कि शराब को निर्धारित एमआरपी से अधिक दाम पर बेचा जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी गतिविधियों से सरकार की छवि खराब न होने दी जाए।
उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, काकीनाडा जिले समेत राज्य के कई इलाकों से इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। शिकायतों की जांच के बाद पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि तय कीमत से अधिक दर पर शराब की बिक्री नियमों के खिलाफ है और इससे सरकार की बदनामी होती है।
जनसेना पार्टी के प्रमुख पवन कल्याण ने कहा कि शराब विक्रेताओं को बिक्री से जुड़े सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पवन कल्याण की जनसेना पार्टी, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में सहयोगी दल है।
इस बीच विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने अवैध शराब बिक्री को लेकर गठबंधन सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि सरकार आंख मूंदकर नियमों के उल्लंघन की इजाजत दे रही है और दुकानदार खुलेआम एमआरपी से ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं।
गौरतलब है कि राज्य मंत्रिमंडल ने पिछले महीने सभी आकार की इंडियन-मेड फॉरेन लिकर और विदेशी शराब की बोतलों की अधिकतम खुदरा कीमत में 10 रुपये प्रति बोतल की बढ़ोतरी का फैसला किया था। साथ ही बार पर लगाए गए अतिरिक्त रिटेल आबकारी कर को वापस लेने का भी निर्णय लिया गया।
सरकार ने स्पष्ट किया था कि 99 रुपये कीमत वाली 180 एमएल की सस्ती शराब, बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक (आरटीडी) श्रेणी पर यह 10 रुपये की बढ़ोतरी लागू नहीं होगी।
इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने इंडियन-मेड फॉरेन लिकर और विदेशी शराब पर खुदरा विक्रेताओं के मार्जिन में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने का भी निर्णय लिया, जिसमें 180 एमएल की इंडियन-मेड फॉरेन लिकर बोतलें, बीयर, वाइन और आरटीडी उत्पाद शामिल हैं।
सरकार का अनुमान है कि इस मूल्यवृद्धि से राज्य को सालाना लगभग 1,391 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, जबकि अतिरिक्त रिटेल आबकारी कर हटाए जाने से बार मालिकों पर सालाना करीब 340 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ कम होगा।