'भुजबन्ध-शक्ति-विकासक' है आधुनिक जीवनशैली का रामबाण! कंधों-हाथों को मज़बूती, शरीर को ऊर्जा और मन को दे ताजगी

कंधों और हाथों को मजबूती तो शरीर को एनर्जी देता है 'भुजबन्ध-शक्ति-विकासक'


नई दिल्ली, 3 फरवरी। आज की भागदौड़ भरी अनियमित दिनचर्या पूरे शरीर को बीमारियों का घर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। हालांकि, योगासन के रोजाना अभ्यास से सेहतमंद रहा जा सकता है। 'भुजबन्ध-शक्ति-विकासक' के अभ्यास से न केवल तन बल्कि मन भी सेहतमंद रहता है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने नित्य योग अभियान के तहत एक सरल और प्रभावी योग क्रिया 'भुजबन्ध-शक्ति-विकासक' को लोगों के दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह दी है। यह क्रिया विशेष रूप से कंधों, भुजाओं और ऊपरी शरीर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में कारगर है। नियमित अभ्यास से न केवल शरीर की शारीरिक शक्ति बढ़ती है, बल्कि एनर्जी, स्फूर्ति और मानसिक ताजगी भी मिलती है।

भुजबन्ध-शक्ति-विकासक योग अभ्यास भुजाओं (आर्म्स) और कंधों की मांसपेशियों को सक्रिय करके उनकी शक्ति और लचीलापन बढ़ाता है। यह क्रिया शरीर के ऊपरी हिस्से में रक्त संचार को बेहतर बनाती है, मांसपेशियों को गठीला और आकर्षक बनाकर थकान दूर करने में मदद करती है।

एक्सपर्ट के अनुसार, यह अभ्यास घर पर आसानी से किया जा सकता है और किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं पड़ती। अभ्यास करने का सरल तरीका सबसे पहले दोनों पैर मिलाकर सीधे खड़े हो जाएं। शरीर को तनावमुक्त रखें। दोनों हाथों की मुट्ठियां बांध लें। फिर दोनों भुजाओं को कोहनी से मोड़ें, ताकि कोहनी और कंधे के बीच 90 डिग्री का कोण बन जाए। मुट्ठियों को एक सीध में रखते हुए दोनों हाथों को तेज गति से वक्षस्थल (छाती) के सामने लाएं और फिर पीछे की ओर ले जाएं। इस क्रिया को आगे-पीछे तेजी से दोहराएं। शुरुआत में इसे 20-30 बार करें, धीरे-धीरे संख्या बढ़ा सकते हैं।

इस अभ्यास से कई लाभ मिलते हैं। कंधों और भुजाओं की मांसपेशियां मजबूत और गठीली बनती हैं। शरीर के ऊपरी हिस्से में रक्त संचार बढ़ता है, जिससे थकान और सुस्ती दूर होती है। कंधों में जकड़न और दर्द से राहत मिलती है। शरीर को एनर्जी मिलती है। नियमित अभ्यास से हाथों की ताकत बढ़ती है और पोश्चर सुधरती है।
 

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