रक्षा क्षेत्र में बदलाव की मिसाल: YIL मात्र 4 साल में लाभ कमाकर बनी मिनीरत्न-1 कंपनी, निर्यात में भी कमाल

रक्षा उपकरण बनाने वाली ‘यंत्र इंडिया लिमिटेड’ को मिला ‘मिनीरत्न' श्रेणी-1 का दर्जा


नई दिल्ली, 2 फरवरी। रक्षा क्षेत्र से जुड़ी ‘यंत्र इंडिया लिमिटेड’ (वाईआईएल) को 'मिनीरत्न' श्रेणी-1 का दर्जा देने की मंजूरी दी गई है। यह मंजूरी सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी। ‘यंत्र इंडिया लिमिटेड’ रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम यानी डिफेंस पीएसयू है। मात्र चार वर्षों के कम समय में यह एक लाभ कमाने वाली कंपनी में परिवर्तित हो गई है।

यह डिफेंस पीएसयू मध्यम और बड़े कैलिबर गोला-बारूद के लिए असेंबली उत्पाद, बख्तरबंद वाहनों के लिए असेंबली उत्पाद व तोपखाने और मुख्य युद्धक टैंकों (एमबीटी) के लिए असेंबली उत्पाद करती है। निर्यात के मोर्चे पर भी वाईआईएल ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

वित्त वर्ष 2021-22 (दूसरी छमाही) में शून्य से वित्त वर्ष 2024-25 में 321.77 करोड़ रुपए की निर्यात वृद्धि दर्ज की है। वाईआईएल के अन्य प्रमुख उत्पादों में कार्बन फाइबर कंपोजिट, ग्लास कंपोजिट, एल्युमीनियम मिश्र धातु आदि शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा मिलने से वाईआईएल के बोर्ड को सरकार की मंजूरी के बिना नए प्रोजेक्ट, आधुनिकीकरण, उपकरण खरीद आदि पर 500 करोड़ रुपए तक का पूंजीगत व्यय करने का अधिकार प्राप्त हो गया है।

इससे कंपनी को रक्षा उत्पादन और निर्यात में तेज विकास तथा नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने में और अधिक सहायता मिलेगी। वाईआईएल ने स्थापना के बाद से कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां अर्जित की हैं। इनमें 2021-22 (दूसरी छमाही) में 956.32 करोड़ रुपए की बिक्री से वित्त वर्ष 2024-25 में 3,108.79 करोड़ रुपए तक की उल्‍लेखनीय वृद्धि शामिल है।

गौरतलब है कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में कार्यात्मक स्वायत्तता, दक्षता बढ़ाने और नवाचार एवं विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने पूर्ववर्ती आयुध कारखाना बोर्ड (ओएफबी) का निगमीकरण करके सात नए रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) का गठन किया था। वाईआईएल नवगठित अनुसूची 'ए' के डीपीएसयू में से एक है। यह रक्षा उत्पादन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत है। मई 2025 में रक्षा मंत्री ने इन सात डीपीएसयू में से तीन-मुनिशन्स इंडिया लिमिटेड, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड और इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड को मिनीरत्न-I का दर्जा देने की मंजूरी दी थी।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इसमें रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। यह व्यापक रक्षा सुधारों के अनुरूप भी है। इन सुधारों का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना, भारतीय उद्योग की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

राजनाथ सिंह ने कंपनी के कारोबार को बढ़ाने, स्वदेशीकरण को अधिकतम करने और मिनीरत्न (श्रेणी-I) का दर्जा प्राप्त करने के लिए अन्य निष्‍पादन मानकों को पूरा करने के लिए वाईआईएल प्रबंधन द्वारा उठाए गए कदमों पर संतोष व्यक्त किया है।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
3,494
Messages
3,526
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top