नई दिल्ली, 2 फरवरी। हिंदू कैलेंडर में फाल्गुन मास का अपना एक अलग महत्व है। यह मास साल का आखिरी महीना माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद इसे नए आरंभ, बदलाव और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। पंचांग के अनुसार 2 फरवरी 2026 से फाल्गुन का आरंभ हो गया है। यह महीना जीवन में शुद्धि, संयम और आध्यात्मिक विकास के लिए बेहद खास माना जाता है।
फाल्गुन का माह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस महीने में कई बड़े पर्व और उत्सव आते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख महाशिवरात्रि और होली हैं। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा की जाती है और रात को जागरण और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है।
वहीं, होली रंगों का त्योहार है, जो प्रेम, भाईचारा और आनंद का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन मास को आनंद और उत्सव का महीना कहा गया है, इसलिए इस दौरान लोग अधिकतर सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं, संयम रखते हैं और पूजा-पाठ में समय देते हैं।
धार्मिक दृष्टि से फाल्गुन मास भगवान शिव और श्रीकृष्ण के लिए समर्पित माना गया है। फाल्गुन में शिव उपासना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि आता है, जबकि कृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ी कई परंपराएं और उत्सव भी इसी मास में मनाए जाते हैं। वृंदावन, बरसाना और मथुरा जैसे धार्मिक स्थलों में फाल्गुन में खास उत्सव और फाग गीतों की परंपरा देखी जाती है। यह महीना भक्तों के लिए भक्ति और आध्यात्मिक साधना का भी अवसर है।
फाल्गुन मास में कई आध्यात्मिक और सामाजिक क्रियाएं की जाती हैं। इस महीने दान करना बेहद पुण्य का काम माना जाता है। गरीबों को अन्न, वस्त्र और रंगों का दान करने से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि ग्रह दोष भी दूर होते हैं। सेवा भाव को भी इस महीने विशेष महत्व दिया जाता है। गरीबों को भोजन कराना और ब्राह्मण और साधुओं की सेवा करना, इन सब कार्यों से जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
इसके अलावा फाल्गुन मास में नियमित पूजा-पाठ का संकल्प लेना चाहिए। शिवलिंग का अभिषेक, महामृत्युंजय जाप और श्रीकृष्ण की पूजा करना इस महीने में विशेष महत्व रखता है। साथ ही, सात्विकता अपनाते हुए मांसाहार से परहेज करना, नियमित स्नान, ध्यान, योग और साधना करना भी लाभकारी माना जाता है।