रेशम उद्योग को मिली नई दिशा! लखनऊ में 'उत्कृष्टता केंद्र' शुरू, अब 'सॉइल टू सिल्क' की पूरी प्रक्रिया सामने

रेशम उद्योग को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम, लखनऊ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ


लखनऊ, 2 फरवरी। उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक एवं ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान और रेशम उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को आमजन के समक्ष प्रस्तुत करने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की गई है।

रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया।

उन्होंने कहा कि यह केंद्र प्रदेश में रेशम उत्पादन, प्रशिक्षण, विपणन और गुणवत्ता पहचान का एकीकृत मंच बनेगा। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ‘सॉइल टू सिल्क’ की पूरी प्रक्रिया का जीवंत एवं चरणबद्ध प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अंतर्गत नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण तथा साड़ी एवं परिधान निर्माण तक की सभी विधाओं को एक ही स्थान पर देखा जा सकेगा।

उन्‍होंने कहा कि इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को शुद्ध रेशम की गुणवत्ता से अवगत कराना और बाजार में उपलब्ध नकली अथवा मिश्रित रेशमी उत्पादों की पहचान कराना है। यह केंद्र प्रशिक्षण और जागरूकता के साथ-साथ एक्जीबिशन एवं मार्केटिंग-कम-सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा। यहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों की सीधी बिक्री की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार मिलेगा।

मंत्री सचान ने बताया कि पूर्व में यह परिसर अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक और उपयोगी स्वरूप दिया गया है। अब यह केंद्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख स्थल बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से अनुदान, तकनीकी सहायता और विपणन सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
 

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