श्रीनगर, 2 फरवरी। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (एमईएस) की एक इमारत के पास दो संदिग्ध लोगों को सेना की वर्दी जैसी पोशाक में घूमते देखा गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना प्रशासन और सुरक्षा बलों को दी, जिसके बाद सेना ने पूरे इलाके में घेराबंदी कर दी।
अधिकारियों के अनुसार, यह घटना बारी ब्राह्मणा इलाके में एमईएस भवन के आसपास हुई। दो अज्ञात व्यक्तियों की संदिग्ध गतिविधि देखते ही स्थानीय लोगों ने सतर्कता दिखाते हुए सूचना दी। सूचना मिलते ही सेना के जवान मौके पर पहुंचे और एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया।
इसके बाद एमईएस परिसर और उसके आसपास तलाशी अभियान शुरू किया गया ताकि दोनों व्यक्तियों की पहचान की जा सके और किसी भी तरह के सुरक्षा खतरे को पूरी तरह से टाला जा सके।
एक अधिकारी ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और कुछ समय के लिए आसपास के इलाके में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण सुरक्षा बल तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में लिया जा सका। फिलहाल, अभियान जारी है और आगे की जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
बता दें कि सांबा जिला अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पास है। इस क्षेत्र में आतंकी संगठन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद, नकदी और नशीले पदार्थ भेजने की कोशिश करते रहे हैं।
बीएसएफ और भारतीय सुरक्षा बल इन ड्रोन को मार गिराने के लिए हाई-टेक एंटी-ड्रोन उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार ये ड्रोन सीमा पार से ही वापस लौटने पर मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा, कुछ मौकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स की फायरिंग की आड़ में आतंकियों के घुसपैठ की कोशिशें भी सामने आई हैं। वहीं, सीमा पार से खोदी गई सुरंगें भी कई बार बीएसएफ द्वारा पकड़ी गई हैं।
जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर भी आतंकियों द्वारा ड्रोन और घुसपैठ की कोशिशें होती रहती हैं। एलओसी की सुरक्षा सेना करती है, जो बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों के साथ-साथ पूंछ, राजौरी और जम्मू क्षेत्र के कुछ हिस्सों में फैली हुई है।