नई दिल्ली, 1 फरवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि को मजबूती देने के लिए कई अहम कदमों की रूपरेखा पेश की। इस बजट में निर्माण, अर्धचालक (सेमीकंडक्टर) विकास, अवसंरचना उन्नयन और डेटा सेंटर वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए नए संसाधनों का प्रावधान किया गया है।
वित्त मंत्री ने 2026-27 में पूंजीगत व्यय को 9 प्रतिशत बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी आवंटनों में से एक है और जीडीपी का 4.4 प्रतिशत है।
रक्षा क्षेत्र को कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनमें 2.31 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं। यह 21.84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है, जिसका उद्देश्य उपकरणों को आधुनिक बनाना, हवाई और नौसैनिक क्षमताओं को मजबूत करना और “आत्मनिर्भर भारत” पहल के तहत स्वदेशी विकास को बढ़ावा देना है।
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना के लिए आवंटन दोगुना कर 40,000 करोड़ रुपये किया गया। बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम के लिए पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे भारत को वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल हब के रूप में स्थापित किया जा सके।
कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण तकनीकों के लिए 20,000 करोड़ रुपये और कंटेनर निर्माण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की नई पहल की गई है।
रेलवे के पूंजीगत खर्च के लिए 2.77 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें सात हाई-स्पीड पैसेंजर कॉरिडोर की योजना शामिल है। गृह मंत्रालय को आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए 2.55 लाख करोड़ रुपये मिले।
राज्यों को वित्त आयोग अनुदानों के जरिए 1.4 लाख करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे, साथ ही वे 41 प्रतिशत कर हिस्सेदारी का लाभ उठाते रहेंगे। वित्त मंत्रालय को सबसे बड़ा हिस्सा 19.72 लाख करोड़ रुपये का मिला, जो ब्याज, सब्सिडी और राज्यों को ट्रांसफर के लिए उपयोग होगा।
मिनरल-रिच राज्यों (ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु) के लिए समर्पित रियर-अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। छोटे, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का नया विकास कोष और आत्मनिर्भर भारत कोष में 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया गया।
कुल बजट व्यय 53.47 लाख करोड़ रुपये है, जबकि राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत तय किया गया है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान 4.4 प्रतिशत से बेहतर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए 7-8 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि की आवश्यकता है, जिसे नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण में 7.4 प्रतिशत और आईएमएफ ने 2025 और 2026 में क्रमशः 7.3 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत अनुमानित किया है।