कोलकाता, 1 फरवरी। तृणमूल कांग्रेस ने रविवार को संसद में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों की कड़ी आलोचना की। टीएमसी का तर्क था कि इन प्रस्तावों में अहम क्षेत्रों के लिए बजटीय व्यय आवंटन में कटौती की गई है।
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलटवार करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस को देश के वित्त प्रबंधन पर सुझाव देने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस शासित पश्चिम बंगाल सरकार पिछले 15 वर्षों से खराब राजकोषीय प्रबंधन का पालन कर रही है।
2026-27 के केंद्रीय बजट प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल के पूर्व वित्त मंत्री और राज्य सरकार के वर्तमान मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अमित मित्रा ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में इस बार बजटीय आवंटन को कुल बजटीय व्यय के 3.8 प्रतिशत से घटाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया गया है, जो कि 2015-16 में था।
उन्होंने कहा कि जब विश्व स्तर पर शिक्षा मद में व्यय में वृद्धि का रुझान था, तब भारत सरकार ने इसे कम करने का निर्णय लिया। इसी प्रकार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के लिए व्यय को इस बार कुल व्यय के 0.19 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है, जबकि 2015-16 में यह 0.21 प्रतिशत था। इस प्रकार की कटौती से यह सिद्ध होता है कि वर्तमान केंद्र सरकार का ध्यान इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नहीं है।
भाजपा विधायक और केंद्र सरकार के पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि देश के वित्तीय मामलों का प्रबंधन अनियंत्रित बाजार ऋण और आवर्ती व्यय में अंधाधुंध वृद्धि के सहारे नहीं किया जा सकता, जो नीति पश्चिम बंगाल सरकार पिछले 15 वर्षों से हूबहू अपना रही है।