ढाका, 1 फरवरी। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले अंतरिम सरकार के फैसलों और कदमों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को लेकर यह धारणा रही है कि उसका दायरा केवल चुनाव की तैयारियों और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज तक सीमित होना चाहिए। लेकिन चुनाव से ठीक पहले लिए गए कई फैसलों, पहलों, नियुक्तियों और अनुबंधों ने विवाद को जन्म दिया है।
बांग्लादेशी दैनिक प्रथम आलो में प्रकाशित एक राय लेख के अनुसार, इन फैसलों में 9वें वेतन आयोग का गठन, प्राथमिक स्कूल शिक्षकों की त्वरित भर्ती प्रक्रिया, मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के लिए भव्य अपार्टमेंट बनाने की योजना, चटगांव बंदरगाह से जुड़े समझौते, मीरसराय आर्थिक क्षेत्र में हथियार ज़ोन की घोषणा और रैपिड एक्शन बटालियन के लिए 163 वाहनों की खरीद का निर्णय शामिल है।
लेख में कहा गया है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में जल्दबाजी में लिए गए ये फैसले क्या वास्तव में जनहित में हैं या फिर इसके पीछे घरेलू और विदेशी हित समूहों का दबाव है। खास चिंता इस बात की है कि इनमें से कई फैसले दीर्घकालिक आर्थिक जोखिम और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों से संबंधित हैं, जिनका बोझ आने वाली निर्वाचित सरकार और आम जनता को वर्षों तक उठाना पड़ सकता है।
डेमोक्रेटिक राइट्स कमेटी (गणतंत्रिक अधिकार समिति) ने भी बयान जारी कर कहा है कि अंतरिम सरकार द्वारा ऐसे “हानिकारक” समझौतों पर हस्ताक्षर करने से नव-निर्वाचित सरकार भी संकट में पड़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने ढाका के मंत्रियों के एन्क्लेव में तीन नई इमारतें बनाने का फैसला किया है, जिनमें कुल 72 फ्लैट होंगे। प्रत्येक फ्लैट का क्षेत्रफल 8,500 से 9,030 वर्ग फुट होगा। फर्नीचर और पर्दों जैसी चीज़ों की खरीद के लिए 200 मिलियन टका का बजट भी निर्धारित किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी तुलना की गई है कि ढाका में सामान्य उच्च-मध्यम वर्ग के लोग आमतौर पर 1,500 से 1,600 वर्ग फुट के फ्लैट में रहते हैं, जबकि निचले स्तर के सरकारी कर्मचारी 650 से 700 वर्ग फुट के घरों में रहते हैं। ऐसे में 9,000 वर्ग फुट के फ्लैटों की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए हैं। लेख में तीखा तंज कसते हुए पूछा गया है कि इतने बड़े फ्लैटों में मंत्री आखिर करेंगे क्या- फुटबॉल या क्रिकेट खेलेंगे?
9वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर भी चिंता जताई गई है। आयोग ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में वृद्धि की सिफारिश की है, लेकिन सरकार का कहना है कि इसे लागू करने की जिम्मेदारी अगली सरकार की होगी। रिपोर्ट के अनुसार, यदि सभी स्तरों पर 100 से 147 प्रतिशत तक वेतन बढ़ाया जाता है, तो इसके लिए लगभग 1.06 ट्रिलियन टका की आवश्यकता होगी, जबकि हाल के वर्षों में बांग्लादेश का राजस्व संग्रह 4 ट्रिलियन टका से आगे नहीं बढ़ पाया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निजी क्षेत्र, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, इस समय बेहद नाज़ुक स्थिति में है। ऐसे में इतनी बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी थोपने का उद्देश्य क्या है, यह सवाल बना हुआ है। मीडिया सुधार आयोग के प्रमुख कमाल अहमद ने इसे आने वाली सरकार पर “एडवांस ब्लैकमेल” जैसा दबाव बताया है।