द्रमुक और माकपा नेताओं ने बजट को बताया निराशाजनक, केरल-तमिलनाडु की अनदेखी का आरोप

द्रमुक और माकपा नेताओं ने बजट को बताया निराशाजनक, केरल-तमिलनाडु की अनदेखी का आरोप


चेन्नई, 1 फरवरी। द्रमुक के संसदीय दल के नेता कनिमोझी और मदुरै से माकपा सांसद सु वेंकटेशन ने रविवार को बजट 2026-27 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने कहा कि तमिलनाडु और केरल के साथ बजट में 'धोखा' हुआ है, जबकि दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उन्होंने इसे बिना विजन वाला बजट बताया।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में बजट पेश किए जाने के दौरान तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल सहित कई राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बड़े ऐलानों की उम्मीद थी। हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि बजट इन क्षेत्रों के लिए किसी भी सार्थक प्रस्ताव को पेश करने में विफल रहा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कनिमोझी ने बजट को “बिना बदलाव का निराशाजनक दस्तावेज” करार दिया। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि “यहां तक कि चुनाव भी केंद्र की भाजपा सरकार को तमिलनाडु की याद दिलाने में नाकाम रहे।” उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बड़े योगदान के बावजूद राज्य की जानबूझकर अनदेखी की गई।

माकपा सांसद सु वेंकटेशन ने भी इसी तरह की आलोचना करते हुए कहा कि यह बजट तमिलनाडु के समर्थन के लिए नहीं, बल्कि उसके प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने इसे “निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया अब तक का सबसे खराब बजट” बताया और कहा कि यह दक्षिणी राज्यों की जरूरतों और आकांक्षाओं के प्रति केंद्र की लगातार उदासीनता को दर्शाता है।

वेंकटेशन ने कहा कि बजट में चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, लेकिन कोयंबटूर और मदुरै मेट्रो रेल जैसी लंबे समय से लंबित परियोजनाओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने तमिलनाडु और केरल के लिए किसी भी नए बुनियादी ढांचे की घोषणा न होने पर भी नाराजगी जताई।

उन्होंने दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की खोज के लिए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों में विशेष आर्थिक कॉरिडोर स्थापित करने के प्रस्ताव पर भी चिंता व्यक्त की। वेंकटेशन के अनुसार, यह कदम “उचित प्रतिफल के बिना संसाधनों के दोहन” के समान है और राज्यों के अपने खनिज संसाधनों पर अधिकार को कमजोर करता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने खनिज नीलामी में राज्य सरकारों की शक्तियां सीमित कर दी हैं, जबकि इसके बदले कोई वित्तीय लाभ नहीं दिया गया। वेंकटेशन ने बजट में आयुर्वेद से जुड़ी पहलों की घोषणा के बावजूद सिद्ध चिकित्सा की अनदेखी और पुरातत्व से जुड़े प्रस्तावों में कीझड़ी (कीलाड़ी) का उल्लेख न होने की भी आलोचना की।

उन्होंने कहा, “इस बजट में जनकल्याण या विकास के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखती। हर स्तर पर यह बजट भ्रामक है।”

दोनों नेताओं ने दावा किया कि बजट में कोई भी सकारात्मक, जन-केंद्रित कदम नहीं है और केंद्र सरकार पर सहकारी संघवाद की बजाय राजनीतिक नियंत्रण को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
 

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