नई दिल्ली, 1 फरवरी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट पेश किया। इस वर्ष के बजट में सशस्त्र बलों के पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। वहीं, पिछले साल यह राशि 1.80 लाख करोड़ रुपए थी। यानी इस साल इस मद में करीब 24 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी की गई है।
दरअसल, इस रकम से भारतीय सेनाओं के लिए नए फाइटर एयरक्राफ्ट, आधुनिक हथियार, युद्धपोत, पनडुब्बियां, ड्रोन, यूएवी और विशेष सैन्य वाहन खरीदे जाएंगे।
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सेना का आधुनिकीकरण अब जरूरत बन चुका है। सरकार ने इस बार साफ तौर पर स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने का फैसला किया है। 1.39 लाख करोड़ रुपए, यानी कुल कैपिटल एक्विजिशन बजट का 75 प्रतिशत, घरेलू उद्योगों से खरीद के लिए तय किया गया है। इसमें निजी कंपनियां भी शामिल होंगी। इससे न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि देश में रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे और कई सहायक उद्योगों को फायदा मिलेगा।
दरअसल रक्षा क्षेत्र को इस बार कुल केंद्रीय बजट का 14.68 प्रतिशत हिस्सा मिला है, जो किसी भी मंत्रालय को मिलने वाला सबसे बड़ा आवंटन है। केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए अब तक का रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।
बीते साल 2025–26 में रक्षा मंत्रालय के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था। इस साल सैन्य आधुनिकीकरण पर खास जोर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह बढ़ा हुआ बजट देश की सैन्य तैयारियों को सुदृढ़ करने, रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
वहीं, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीकी विकसित करने पर भी फोकस रखा गया है। कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान है। बजट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि थलसेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस राशि से आधुनिक हथियार प्रणालियों, नई तकनीकों और अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद को गति मिलेगी और भविष्य की चुनौतियों के लिए हमारी सेनाएं और अधिक तैयार होंगी। राजस्व मद के तहत रक्षा बजट में 3.65 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें से 1.58 लाख करोड़ रुपए ऑपरेशनल तैयारियों और रखरखाव पर खर्च होंगे। इससे जरूरी स्पेयर पार्ट्स, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों की नियमित जरूरतें पूरी होंगी।
डीआरडीओ के बजट आवंटन में भी वृद्धि की गई है। इसले रक्षा अनुसंधान को नई रफ्तार मिलेगी। डीआरडीओ का बजट बढ़ाकर 29,100 करोड़ रुपए कर दिया गया है। इसमें से बड़ी राशि नई तकनीक, रिसर्च और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के विकास पर खर्च होगी। रक्षा मंत्रालय के लिए आवंटित बजट को तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप रक्षा मंत्रालय को दिया गया यह बजट आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर केंद्रित है। साथ ही, रक्षा खरीद प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है।