दिल्ली में पुलिस को वीडियो से ब्लैकमेल कर वसूली करने वाले गिरोह के 2 और सदस्य रंगे हाथों दबोचे

दिल्ली: ट्रैफिक धोखाधड़ी और पुलिसकर्मियों से वसूली में दो और आरोपी गिरफ्तार


नई दिल्ली, 1 फरवरी। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (एआरएससी) सेल ने रविवार को ट्रैफिक धोखाधड़ी और जबरन वसूली सिंडिकेट से जुड़े दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आमिर चौधरी सिकंदर और संजय गुप्ता शामिल हैं। इससे पहले इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

क्राइम ब्रांच ने यह कार्रवाई दो अलग-अलग ऑपरेशनों के तहत की। पहले ऑपरेशन में जीशान अली के नेतृत्व वाले सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य आमिर चौधरी को पकड़ा गया। यह गिरोह ट्रैफिक पुलिस और अन्य सरकारी अधिकारियों के चुपके से वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था और पैसे की वसूली करता था। सुल्तानपुरी निवासी आमिर चौधरी पेशे से कैब ड्राइवर है। उसे एक सरकारी अधिकारी से जबरन वसूली की रकम लेते हुए रंगे हाथों एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल की टीम ने गिरफ्तार किया। उसके पास से 60 हजार रुपए और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

दूसरे ऑपरेशन में कुख्यात गैंग लीडर राजकुमार के मुख्य सहयोगी संजय गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। करावल नगर का निवासी संजय गुप्ता पेशे से ट्रांसपोर्टर है। इसने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी के दौरान वीडियो रिकॉर्ड करने और उनमें हेरफेर करता था। इन वीडियो के जरिए वह पुलिसकर्मियों को विभागीय कार्रवाई और कानूनी मामलों की धमकी देकर पैसे वसूलता था।

आरोपी संजय गुप्ता के खिलाफ पहले भी जबरन वसूली, डकैती और पॉक्सो एक्ट के मामले दर्ज हैं। इसकी पुलिस काफी समय से तलाश कर रही थी।

जांच के अनुसार पता चला कि यह सिंडिकेट कमर्शियल वाहन चालकों को भी धोखा देता था और फर्जी स्टिकर व समानांतर अवैध सिस्टम के जरिए चालान से बचने में मदद करता था। क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल ने सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और आगे की जांच जारी है।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक धोखाधड़ी और जबरन वसूली में शामिल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें एक ऐसा आरोपी शामिल था, जो नो-एंट्री घंटों के दौरान वाणिज्यिक वाहनों की अवैध आवाजाही में मदद करता था।

पुलिस ने बताया था कि एआरएससी ने रिंकू राणा उर्फ भूषण को गिरफ्तार किया है, जो ऐसे गैंग का सरगना था, जिसका काम वाणिज्यिक वाहन मालिकों और चालकों को अवैध स्टिकर बेचना था। इसके लिए वह हर गाड़ी से 2,000 से 5,000 रुपए प्रति महीने वसूलता था। ये स्टिकर ट्रैफिक नियमों से छूट का भ्रामक दावा करते थे, जिससे वाहन प्रतिबंधित समय के दौरान भी बेरोकटोक निकल जाते थे।
 

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