केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार का रोमांचक आगाज़, शुरुआती तेजी के बाद दिखा उतार-चढ़ाव, ऑटो शेयरों में उछाल

केंद्रीय बजट 2026 पेश होने से पहले भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला, ऑटो शेयरों में तेजी


मुंबई, 1 फरवरी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले रविवार के विशेष सत्र में भारतीय शेयर बाजार मामूली तेजी के साथ सपाट खुला। हालांकि कुछ ही देर बाद बाजार लाल निशान में आ गया। इसके बाद बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

खबर लिखे जाने तक (सुबह 9:30 बजे), 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 55.11 अंक या 0.07 प्रतिशत बढ़कर 82,324.89 पर था, जबकि एनएसई निफ्टी 3.50 अंक या 0.01 प्रतिशत गिरकर 25,317.15 पर कारोबार कर रहा था।

वहीं, व्यापक बाजार भी शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स क्रमशः 0.32 प्रतिशत और 0.83 प्रतिशत नीचे थे।

सेक्टरवार देखें तो निफ्टी ऑटो, निफ्टी फार्मा, प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी हेल्थकेयर को छोड़कर अन्य इंडेक्स लाल निशान में थे, जिनमें निफ्टी मेटल सबसे अधिक गिरावट दर्ज करने वाला सूचकांक रहा, जो 4 प्रतिशत से अधिक नीचे कारोबार कर रहा था।

सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, बीईएल, पावर ग्रिड, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक और मारुति सुजुकी के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे। तो वहीं इंफोसिस, टाटा स्टील, टाइटन, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज, रविवार 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट संसद में पेश करेंगी। बजट भाषण भारतीय समयानुसार सुबह 11 बजे संसद में शुरू होगा। यह पहली बार होगा जब वार्षिक केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा। बजट के बाद इससे जुड़े सभी दस्तावेज लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में प्रस्तुत किए जाएंगे। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा।

बजट से पहले 29 जनवरी को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 पेश किया गया। वार्षिक सर्वेक्षण में व्यापक आर्थिक स्थिरता का हवाला देते हुए वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.8-7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इसमें स्वदेशी को सरकार के रणनीतिक दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव के केंद्र में रखा गया है। सर्वेक्षण में भारत की मध्यम अवधि की संभावित वृद्धि दर को वित्त वर्ष 2023 के आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमानित 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है, जो हाल के वर्षों में नीतिगत सुधारों के कुल प्रभाव को दर्शाता है।
 
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