भारत पर्व 2026 का लाल किले पर समापन, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले- यह देश की जीवंत भावना का अनुभव

लाल किले के लॉन में आयोजित भारत पर्व 2026 के समापन समारोह में शामिल हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन


नई दिल्ली, 31 जनवरी। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शनिवार को नई दिल्ली के लाल किले के मैदान पर आयोजित भारत पर्व 2026 के समापन समारोह में भाग लिया। यह छह दिवसीय महोत्सव, जो पर्यटन मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस उत्सव के एक हिस्से के रूप में आयोजित किया गया था, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, कला परंपराओं और पर्यटन की संभावनाओं को प्रदर्शित करता है।

समारोह में उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत पर्व केवल एक महोत्सव नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत अनुभव है जो भारत की कालातीत भावना को जीवित करता है। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव ने 77वें गणतंत्र दिवस की भावना को आगे बढ़ाया और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से राष्ट्र की आत्मा को दर्शाया।

गणतंत्र दिवस परेड का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह भारत की एकता और विविधता, शक्ति में अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण प्रगति का शक्तिशाली प्रतीक है। उन्होंने विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों द्वारा प्रस्तुत झांकी की सराहना करते हुए कहा कि इन झांकी ने आत्मविश्वासी, रचनात्मक और प्रगतिशील भारत की कहानी को सुंदर तरीके से बताया, जो 2047 तक एक "विकसित भारत" बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि यह वर्ष 'वन्दे मातरम्' के 150 वर्षों के ऐतिहासिक अवसर के रूप में खास महत्व रखता है, और यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता और एकता की भावना को जगाता था, जो आज भी मातृभूमि के प्रति सम्मान की प्रेरणा देता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत पर्व "एक भारत श्रेष्ठ भारत" की भावना को दर्शाता है, क्योंकि यह पूरे देश की परंपराओं, शिल्प, व्यंजनों और कला रूपों को एक ही मंच पर प्रस्तुत करता है। उन्होंने काशी तमिल संगमम जैसी पहल को भारत की सांस्कृतिक एकता और दीर्घकालिक संबंधों के जीवंत उदाहरण के रूप में बताया।

भारत के 'अमृत काल' के दौरान परिवर्तन पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि बुनियादी ढांचे का विस्तार, डिजिटल सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, महिला नेतृत्व वाले विकास और युवा नवाचार राष्ट्र की नींव को फिर से आकार दे रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में 400 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटकों के आगमन से यह दिखता है कि भारत में यात्रा करने का उत्साह और आत्मविश्वास फिर से बढ़ गया है।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि कनेक्टिविटी और पर्यटन अवसंरचना में निरंतर निवेश, जैसे बेहतर सड़क नेटवर्क, विस्तारित रेल कनेक्टिविटी (वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनें), नए हवाई अड्डे और धरोहर स्थलों पर बेहतर सुविधाएं, देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से पूर्वोत्तर क्षेत्रों, में संतुलित क्षेत्रीय विकास को सुनिश्चित कर रहे हैं।

उन्होंने पर्यटन मंत्रालय को भारत पर्व को एक सफल वार्षिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित करने के लिए बधाई दी और यह भी कहा कि इसने एक ऐसा मंच तैयार किया है जहां संस्कृति, पर्यटन और राष्ट्रीय गौरव आपस में जुड़ते हैं। उन्होंने कलाकारों, कारीगरों, प्रदर्शनकारियों, स्वयंसेवकों और आयोजकों की भी सराहना की, जिन्होंने इस महोत्सव को समावेशी, सुरक्षित और यादगार बनाने में योगदान दिया।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के अंत में नागरिकों से आग्रह किया कि वे भारत का अन्वेषण करते रहें, इसे मनाते रहें और इसे एक साथ मिलकर बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत पर्व भारत के लोगों, क्षेत्रों और संस्कृतियों के बीच के बंधन को मजबूत करता रहेगा।
 

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