CBI-SC अधिकारी बन 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा! गोवा पुलिस ने 1.42 करोड़ ठगी के दो आरोपी असम से पकड़े

गोवा पुलिस ने असम में 'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी मामले में दो आरोपियों को किया गिरफ्तार


पणजी, 31 जनवरी। गोवा पुलिस के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने एक बड़े अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी (डिजिटल गिरफ्तारी) मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस धोखाधड़ी में 1,42,04,868 रुपए की राशि शामिल थी।

यह मामला 31 दिसंबर 2025 को अपराध संख्या 54/25 के तहत दर्ज किया गया था, और आरोपियों ने गोवा के बिचोलिम निवासी से धोखाधड़ी की थी।

आरोपियों ने सीबीआई और सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों का प्रतिरूपण करते हुए कई व्हाट्सएप नंबरों का इस्तेमाल किया और शिकायतकर्ता को एक नकली 'डिजिटल गिरफ्तारी' का शिकार बना दिया। इसके बाद उन्होंने शिकायतकर्ता को मजबूर किया और 1,42,04,868 रुपए की राशि कई बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली।

साइबर क्राइम शाखा की विशेष टीम ने धोखाधड़ी करने वालों और पीड़ित के बीच तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों का पता लगाया और उन्हें असम के नगांव से गिरफ्तार किया। इस टीम में पीआई विकास देयकर, पीसी अरिफ आगा, पीसी रुपेश गायकवाड़, और पीसी प्रकाश शामिल थे।

आशादुल इस्लाम, 24 साल निवासी असम और यासमिना अहमद, 32 साल निवासी असम को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तारी के बाद यह पाया गया कि आरोपियों को पहले भी असम के नगांव पुलिस स्टेशन में इसी तरह के साइबर धोखाधड़ी मामलों में गिरफ्तार किया गया था। उन पर एफआईआर भी दर्ज थी, जिसमें उनके पास से 358 सिम कार्ड, 5 मोबाइल फोन, 1 वाई-फाई राउटर, 1 डीवीआर और 1 लैपटॉप जब्त किया गया था।

यही मोबाइल फोन गोवा मामले में भी उपयोग किए गए थे। असम पुलिस द्वारा की गई जब्ती अब गोवा पुलिस के मामले में भी शामिल की जाएगी। इसके अलावा, यही मोबाइल नंबर गोवा में एक और डिजिटल गिरफ्तारी धोखाधड़ी मामले से जुड़े थे, जिसमें 63,50,000 रुपए की धोखाधड़ी हुई थी।

जांच से यह भी पता चला कि आरोपी एक जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करके कई मोबाइल नंबर चला रहे थे। यह उपकरण पूरे देश में कई साइबर धोखाधड़ी मामलों से जुड़े पाए गए। ये आरोपी पूरे देश में वित्तीय धोखाधड़ी की एक श्रृंखला के मुख्य आरोपी हैं, और उम्मीद की जा रही है कि इससे कई अन्य मामलों का भी समाधान होगा।

गोवा पुलिस को इस मामले में असम पुलिस से सहयोग मिला। इस मामले के लिए गोवा और असम पुलिस की संयुक्त टीम का गठन किया गया था, जिसमें अपराध शाखा और साइबर सेल के तीन दल शामिल थे। इस मामले का पूरा विश्लेषण पीएसआई नवीन नाइक और पीसी संयोग शेट्ये ने साइबर पुलिस स्टेशन से किया।

आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया है और आगे की जांच पीआई दीपक पेडनेकर के मार्गदर्शन में की जा रही है।
 

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