मुंबई, 31 जनवरी। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव आयोग को लेकर उठाए गए सवालों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री को यह अधिकार है कि वह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और नियमों में बदलाव की मांग करे।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में काम करता हुआ नजर आता है। यदि किसी अधिकारी पर बार-बार पक्षपात के आरोप लगते हैं, तो मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उनके तबादले की मांग करने का पूरा अधिकार है। यदि सरकार सही है तो उसे चिंता करने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि गलत है तो ऐसे चुनाव आयोग का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आनंद दुबे ने आईएएनएस से कहा कि उन्हें केवल विपक्षी नेताओं पर टिप्पणी करने के बजाय असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के भड़काऊ बयानों पर भी ध्यान देना चाहिए। दुबे ने आरोप लगाया कि हिमंता बिस्वा सरमा ने मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयान दिए हैं, जो देश की सामाजिक एकता के लिए खतरनाक हैं।
उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'सबका साथ, सबका विकास' की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे बयान देश में जहर घोलने का काम करते हैं। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा और एआईएमआईएम जैसे दल एक-दूसरे की 'ए और बी टीम' की तरह काम कर रहे हैं और दोनों की राजनीति समाज को बांटने वाली है।
गोहत्या और बीफ निर्यात के मुद्दे पर आनंद दुबे ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत में गाय को माता का दर्जा दिया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण से इसका गहरा संबंध है। हम बचपन से गाय को रोटी खिलाकर बड़े होते हैं, ऐसे में गोहत्या और मांस का निर्यात बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
आनंद दुबे ने मांग की कि सरकार इस पर सख्त कानून बनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में बीफ निर्यात में बढ़ोतरी हुई है और कुछ नेता खुले तौर पर इसके सेवन की बात करते हैं, जो सरकार के 'हिंदुत्व' के दावे पर सवाल खड़ा करता है।
दुबे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने दो-तीन महीनों में इस दिशा में कदम नहीं उठाए तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिवसेना हमेशा गौमाता के सम्मान के लिए मैदान में रहेगी और उसे राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने की मांग करेगी।
महाराष्ट्र की राजनीति पर बोलते हुए आनंद दुबे ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अजित पवार महाराष्ट्र के बड़े नेता रहे हैं और उनके परिवार में शोक का माहौल है। हिंदू परंपरा में कम से कम तेरह दिनों तक शोक का समय माना जाता है, ऐसे में इतनी जल्दबाजी समझ से परे है।
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने आशंका जताई कि भाजपा को डर है कि कहीं एनसीपी के दोनों गुट एकजुट होकर एनडीए से बाहर न चले जाएं और महाविकास आघाड़ी या इंडिया ब्लॉक की ओर न झुक जाएं। उन्होंने कहा कि भाजपा इसी डर के कारण तेजी से राजनीतिक कदम उठा रही है।
दुबे ने कहा कि एनसीपी में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे वरिष्ठ नेता हैं, जो अपने फैसले खुद ले सकते हैं। ऐसे में कुछ दिनों का इंतजार किया जा सकता था।