एपीएसएसडीसी-सीमेंस घोटाला: ईडी की बड़ी कार्रवाई, कौशल विकास के 54.74 करोड़ डकारने वालों की संपत्ति कुर्क

एपीएसएसडीसी-सीमेंस प्रोजेक्ट घोटाला: ईडी की कार्रवाई, 54.74 करोड़ की संपत्ति कुर्क


हैदराबाद, 31 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एपीएसएसडीसी) के सीमेंस प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए डिज़ाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (डीटीएसपीएल), उसके प्रबंध निदेशक विकास विनायक खानवेलकर, सुमन बोस, मुकुल चंद्र अग्रवाल, सुरेश गोयल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दायर की है।

यह शिकायत विशेष पीएमएलए कोर्ट, विशाखापत्तनम में दायर की गई, जिस पर अदालत ने 28 जनवरी 2026 को संज्ञान ले लिया है।

ईडी ने यह जांच आंध्र प्रदेश सीआईडी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि एपीएसएसडीसी के सीमेंस प्रोजेक्ट के तहत आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा निवेश की गई राशि को अन्य उद्देश्यों के लिए मोड़कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। यह परियोजना राज्य में कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।

जांच में ईडी ने पाया कि डिज़ाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी विकास खानवेलकर, सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व एमडी सौम्याद्री शेखर बोस उर्फ सुमन बोस तथा उनके करीबी सहयोगियों ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया। आरोप है कि शेल और बंद पड़ी कंपनियों के जरिए बहु-स्तरीय लेनदेन किए गए और फर्जी इनवॉइस के आधार पर सामग्री और सेवाओं की आपूर्ति दिखाकर धन की हेराफेरी की गई। इसके लिए एंट्री प्रोवाइडर्स की सेवाएं ली गईं, जिन्हें कमीशन भी दिया गया।

ईडी ने जांच के दौरान 4 मार्च 2023 को विकास खानवेलकर, सुमन बोस, मुकुल चंद्र अग्रवाल और सुरेश गोयल को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अप्रैल 2023 में डीटीएसपीएल के नाम पर मौजूद 31.20 करोड़ रुपये की सावधि जमा (एफडी) को कुर्क किया गया। मई 2023 में इस मामले में पहली अभियोजन शिकायत दायर की गई थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया था।

आगे की जांच में ईडी ने अन्य आरोपियों और एंट्री प्रोवाइडर्स के पास मौजूद अतिरिक्त अपराध की आय की पहचान की। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और पुणे में स्थित बैंक बैलेंस, शेयर और अचल संपत्तियों सहित 23.54 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क किया गया।

इस तरह, अब तक इस मामले में कुल 54.74 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।

ईडी द्वारा आगे की गई जांच के आधार पर ही यह पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की गई, जिस पर विशेष पीएमएलए कोर्ट, विशाखापत्तनम ने 28 जनवरी 2026 को संज्ञान लिया है।
 

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