पटना, 31 जनवरी। भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने पटना में नीट छात्रा के मौत मामले की जांच सीबीआई से कराने की सरकार की अनुशंसा को जनांदोलनों और परिजनों के संघर्षों की जीत बताया है।
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में छात्रा से जुड़े दुष्कर्म–हत्या की जघन्य घटना को लेकर आइसा, छात्र-महिलाओं और परिजनों के चल रहे व्यापक जनांदोलनों और लगातार बढ़ते दबाव के आगे आखिरकार बिहार सरकार को झुकना पड़ा है और उसने सीबीआई जांच की सिफारिश की है। उन्होंने इसे जनसंघर्षों की जीत बताते हुए कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सिर्फ सीबीआई जांच की सिफारिश पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सीटिंग जज के प्रत्यक्ष निर्देशन और निगरानी में कराई जाए, ताकि निष्पक्ष, स्वतंत्र और भरोसेमंद जांच सुनिश्चित हो सके।
भाकपा माले महासचिव ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बिहार सरकार और उसका पुलिस-प्रशासन शुरू से ही नकारात्मक और संदिग्ध भूमिका निभाता रहा है। पुलिस-प्रशासन का रवैया घटना को दबाने वाला, बलात्कार-हत्या जैसी संगीन सच्चाई से इनकार करने वाला व प्रभावशाली और रसूखदार आरोपियों को बचाने वाला रहा है। ऐसे में राज्य सरकार की एजेंसियों पर न्याय की जिम्मेदारी छोड़ना पीड़ित परिवार और समाज के साथ अन्याय होगा।
भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को मृतक छात्रा के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय की इस लड़ाई में पार्टी और जनांदोलनों के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि बिहार की बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और न्याय की लड़ाई है, जिसे निर्णायक अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि न्याय की मांग को लेकर ऐपवा और आइसा के संयुक्त आह्वान पर 'बेटी बचाओ-न्याय यात्रा' का आयोजन किया जाएगा। यह यात्रा जहानाबाद से शुरू होकर नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद, अरवल, पटना जिलों से गुजरते हुए व्यापक जनसमर्थन जुटाएगी। यह यात्रा चार से 10 फरवरी तक चलेगी और 10 फरवरी को पटना में विधानसभा मार्च आयोजित किया जाएगा।