पटना, 30 जनवरी। बिहार विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत दो फरवरी से होने वाली है। उससे पहले शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है।
बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, "सभी नेताओं की बैठक हुई है। बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने विषय रखा था कि सदन की कार्रवाई ठीक ढंग से चले। सदन में उत्तेजना नहीं हो। सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी अपना सुझाव दें, जिसके बाद सभी दलों के सदस्यों ने अपना सुझाव दिया।"
उन्होंने महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए देने को लेकर वादे पर सहमति भरते हुए कहा, "यह कोई नई बात नहीं है, मुख्यमंत्री पहले से कह रहे हैं कि 1.56 करोड़ जीविका दीदियों के खाते में महिला रोजगार की शुरुआत करने के लिए पैसा दिया गया है। जो भी रोजगार को बढ़ाएंगे, उन्हें दो लाख रुपए तक आर्थिक सहायता आगे दी जाएगी। ऐसे में आज जीविका दीदियों रोजगार के क्षेत्र में आगे काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने जो सहायता देने के लिए कहा था, वह सहायता दिया जाएगा। यह कई चरणों में दिया जाएगा। इससे बिहार विकास की ओर अग्रसर होगा।"
सीपीआई-एमएल नेता अरुण सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "हमारी ऐसी परंपरा रही है कि जब भी कोई सत्र चलने वाला होता है, उससे पहले विधायक और मंत्रियों की बैठक बुलाई जाती है। बैठक में यही चर्चा हुई है कि सत्र में सिस्टम के साथ सवाल उठाया जाए। सरकार सभी सवालों का जवाब देगी। सरकार को सवालों का सही उत्तर देना चाहिए, वहीं विपक्ष की जिम्मेदारी है कि वह सरकार के सवालों को ध्यान से सुने। अगर ऐसा नहीं होता है तो विपक्ष अपनी बात को सुनाने के लिए मजबूर होता है।"
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता आलोक कुमार मेहता ने कहा, "विधानसभा सर्वदलीय बैठक आगामी बजट सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए बुलाई गई थी। यह बैठक सफल रही है। सभी दलों के नेता उपस्थित हुए थे। एक अच्छे माहौल पर चर्चा हुई।"
उन्होंने यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट के रोक पर कहा, "यह कोर्ट का मामला है। हम इस पर क्या टिप्पणी कर सकते हैं? हम सभी के न्याय की बात करते हैं। सभी को न्याय मिलना चाहिए। इस पर सकारात्मक रूप से चर्चा होनी चाहिए।"