"न्याय दो, हक दो!" कर्नाटक सरकार का हल्ला बोल: टैक्स बंटवारे और वित्तीय संघवाद में न्याय के लिए छेड़ा अभियान

कर्नाटक सरकार ने टैक्स बंटवारे और वित्तीय संघवाद में न्याय की मांग उठाई


बेंगलुरु, 30 जनवरी। कर्नाटक सरकार ने 16वें वित्त आयोग के समक्ष टैक्स डिवोल्यूशन (कर बंटवारा) और वित्तीय संघवाद के मुद्दे पर अपने वैध और संवैधानिक रूप से आधारित दावे रखे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

इस संबंध में कर्नाटक सरकार ने पोस्टर जारी कर एक जनजागरूकता अभियान भी शुरू किया है।

मुख्यमंत्री ने बताया, “इस अभियान- ‘जस्टिस फॉर कर्नाटक, फेयर शेयर, स्ट्रॉन्ग फेडरलिज़्म’ के तहत सरकार ने नौ पोस्टर जारी किए हैं, जिनमें वित्त आयोग के सामने रखी गई प्रमुख मांगों को उजागर किया गया है।”

सिद्धारमैया ने कहा कि इन मांगों में कर्नाटक के न्यायसंगत टैक्स हिस्से की बहाली, आय, जनसंख्या और सकल राज्य घरेलू उत्पाद से जुड़े अन्यायपूर्ण मानकों में सुधार, आपदा और पर्यावरणीय सहायता में निष्पक्षता, विकेंद्रीकरण को मजबूत करना, बेंगलुरु के लिए समर्पित बुनियादी ढांचा सहायता, कल्याण कर्नाटक जैसे पिछड़े क्षेत्रों को विशेष समर्थन और सहकारी संघवाद की संवैधानिक भावना को बनाए रखना शामिल है।

मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि यह पहल नागरिकों को जानकारी देने, तथ्यों को रिकॉर्ड पर लाने और यह समझाने के लिए है कि निष्पक्ष टैक्स बंटवारा कोई एहसान नहीं, बल्कि राज्य का अधिकार है।

उन्होंने कहा, “कर्नाटक केवल वही मांग रहा है, जो उसका हक है- न्याय, निष्पक्षता और भारत के संघीय ढांचे में सम्मान।”

सिद्धारमैया ने उम्मीद जताई कि 16वां वित्त आयोग इन चिंताओं को अपनी सिफारिशों में उचित रूप से शामिल करेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इन्हें बिना किसी भेदभाव या राजनीतिक पक्षपात के, पूरी भावना और अक्षरशः लागू करेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक देश के सबसे बड़े राजस्व योगदानकर्ताओं में शामिल होने के बावजूद, पहले टैक्स डिवोल्यूशन में उसका हिस्सा 4.71 प्रतिशत से घटाकर 3.64 प्रतिशत कर दिया गया, जिससे राज्य को लगभग 80,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
 

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