बेंगलुरु में लोकायुक्त का बड़ा खुलासा: चिट फंड मामले में 4 लाख रिश्वत लेते पुलिस इंस्पेक्टर गोविंदराजू रंगे हाथों गिरफ्तार

बेंगलुरु में लोकायुक्त अधिकारियों ने रिश्वत लेते हुए पुलिसकर्मी को रंगे हाथों पकड़ा


बेंगलुरु, 30 जनवरी। बेंगलुरु के केपी अग्रहारा पुलिस स्टेशन में तैनात एक पुलिस इंस्पेक्टर को शुक्रवार को कर्नाटक लोकायुक्त अधिकारियों ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी एक चिट फंड धोखाधड़ी मामले से एक व्यक्ति का नाम हटाने के लिए 4 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।

आरोपी अधिकारी की पहचान इंस्पेक्टर गोविंदराजू के रूप में हुई है। उन्हें मैसूर रोड स्थित सीएआर ग्राउंड्स में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक शिवप्रकाश देवराज ने शुक्रवार को बताया कि इंस्पेक्टर ने इससे पहले 24 जनवरी को 5 लाख रुपए की रिश्वत की मांग में से 1 लाख रुपये रिश्वत के रूप में स्वीकार किए थे। यह मामला अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 के तहत पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

एसपी ने बताया कि आरोपी इंस्पेक्टर को चामराजपेटे सीएआर ग्राउंड के पास शिकायतकर्ता अकबर से पैसे लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोप है कि रिश्वत आरोपी को मामले से हटाने के लिए ली गई थी।

गोविन्दराजु को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इंस्पेक्टर गोविन्दराजु ने कथित तौर पर गिरफ्तारी के समय हंगामा किया और जाल बिछाने की कार्रवाई के दौरान आक्रामक हो गए। रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने के बाद इंस्पेक्टर द्वारा हंगामा करने का एक वीडियो सामने आया है।

वीडियो में लोकायुक्त अधिकारियों को उनके आक्रामक व्यवहार के बावजूद उन्हें हिरासत में लेते हुए दिखाया गया है। एक समय ऐसा भी आया जब छह लोकायुक्त अधिकारी इंस्पेक्टर को हिंसक होने पर रोकते हुए नजर आए। उन्हें चिल्लाते और हंगामा करते हुए सुना गया।

पुलिस ने बताया कि रिश्वत की मांग तब की गई जब इंस्पेक्टर चिट फंड धोखाधड़ी मामले की जांच कर रहे थे। जाल बिछाने से पहले, इंस्पेक्टर इस मामले के संबंध में आरोपी को गिरफ्तार करने गए थे। इस गिरफ्तारी अभियान का एक वीडियो भी सामने आया है।

वीडियो में दिखाया गया है कि गिरफ्तारी का प्रयास एक प्लॉट पर किया गया, जहां आरोपी ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। आरोपी ने कहा कि आप बिना नोटिस जारी किए आए हैं। हम अपने वकील से बात करेंगे। इसके बाद पुलिस ने होयसला गश्ती वाहन बुलाया और उसे थाने ले गई।

थाने पहुंचने के बाद कथित तौर पर एक समझौता हुआ। इंस्पेक्टर ने आरोपी को मामले से हटाने के लिए 5 लाख रुपए की मांग की। पहले 1 लाख रुपए ले लिए गए, और बाद में आरोपी को शेष 4 लाख रुपए लाने का निर्देश दिया गया। 4 लाख रुपए लेते समय इंस्पेक्टर गोविन्दराजु लोकायुक्त के जाल में फंस गए।
 

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