उपमुख्यमंत्री पद की अटकलों पर वारिस पठान बोले, अजित दादा की भरपाई आसान नहीं

उपमुख्यमंत्री पद की अटकलों पर वारिस पठान बोले-अजित दादा की भरपाई आसान नहीं


मुंबई, 30 जनवरी। महाराष्ट्र की सियासत में अजित पवार की मौत के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज है। इस पूरे मुद्दे पर एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अजित दादा की जगह ले पाना आसान नहीं होगा।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से संबंधित पार्टी का अंदरूनी मामला है और इस पर बाहरी तौर पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। पार्टी जो भी फैसला लेगी, वह उसका अपना निर्णय होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अजित पवार की जगह लेना किसी के लिए आसान नहीं है।

वारिस पठान ने कहा कि अजित पवार ने लंबे समय तक कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाली और सुबह से शाम तक बिना थके काम किया। उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और सम्मान अर्जित किया। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में अजित दादा की भरपाई कर पाना बेहद मुश्किल होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सुनेत्रा पवार राज्यसभा की सदस्य हैं, वे सक्रिय रूप से लोगों से मिल रही हैं और देवेंद्र फडणवीस से भी उनकी बातचीत चल रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिरकार उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है।

इसी बातचीत के दौरान एनसीपी के दो गुटों के संभावित विलय को लेकर चल रही अटकलों पर भी वारिस पठान ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे भी मीडिया के माध्यम से लगातार ऐसे बयान सुन रहे हैं कि मर्जर होना था, हो रहा है या होने वाला है। लेकिन यह विलय किस आधार पर हो रहा है और इसके पीछे की वास्तविक वजहें क्या हैं, यह वही पार्टी नेता बेहतर तरीके से बता सकते हैं, जो उन बैठकों का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद ही इस पूरे मसले पर स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।

वारिस पठान ने यह भी कहा कि फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेयर कौन बनेगा, इस पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि प्रदेश की जनता ने जिस भरोसे के साथ सरकार को वोट दिया है, उस भरोसे पर खरा उतरना सरकार की जिम्मेदारी है और जनता की अपेक्षाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं, अजित पवार के अचानक निधन के बाद महायुति को हुए नुकसान के सवाल पर वारिस पठान ने इसे प्रदेश के लिए बेहद दुखद क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अजित दादा का इस तरह अचानक चले जाना न केवल उनके समर्थकों बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई राजनीति में करना आसान नहीं होगा।
 

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