आतंकी फंडिंग में फिनटेक का खेल: एफएटीएफ ने पाकिस्तान पर बढ़ाई निगरानी, जमीनी हकीकत पर सवाल

एफएटीएफ दायित्वों के पालन को लेकर पाकिस्तान पर बढ़ी निगरानी


वॉशिंगटन, 30 जनवरी। वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की 40 सिफारिशों के अनुरूप पाकिस्तान का कानूनी ढांचा भले ही कागजों पर मेल खाता दिखे, लेकिन जमीनी स्तर पर उसके क्रियान्वयन में गंभीर असंगतियां बनी हुई हैं।

एफएटीएफ की 2025 आतंकवादी वित्तपोषण जोखिमों पर व्यापक अपडेट रिपोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा है कि आतंकी फंडिंग के तरीकों में तेजी से बदलाव हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन अब बैंकों की जगह फिनटेक प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं, ताकि निगरानी से बचा जा सके।

‘द सिफर ब्रीफ’ में लिखते हुए वॉशिंगटन स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति विश्लेषक सिद्धांत किशोर ने कहा कि फरवरी 2026 में मेक्सिको सिटी में होने वाली एफएटीएफ प्लेनरी और वर्किंग ग्रुप बैठकों में पाकिस्तान एक बार फिर खुद को जिम्मेदार आतंकवाद-रोधी साझेदार के रूप में पेश करेगा। उन्होंने लिखा, “दक्षिण एशिया की हिंसा से दूर सम्मेलन कक्षों में पाकिस्तान अनुपालन रिपोर्ट, कानूनी संशोधन और सुधारों के आश्वासन के साथ अपनी छवि पेश करेगा।”

किशोर के अनुसार, “कागजों पर पाकिस्तान के वित्तीय नियम कई विकासशील लोकतंत्रों जैसे दिखते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि आतंकवाद को वित्तपोषित और सक्षम बनाने वाले नेटवर्क लगातार खुद को ढाल रहे हैं और सक्रिय बने हुए हैं। रूप और व्यवहार के बीच यह बढ़ता अंतर वही है, जिससे पश्चिमी नीति-निर्माताओं को एफएटीएफ की अगली समीक्षा से पहले निपटना होगा।”

खुले स्रोतों की रिपोर्टिंग और प्रलेखित वित्तीय खुफिया पैटर्न का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को खत्म करने के बजाय उनका “आधुनिकीकरण” किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित ये आतंकी संगठन गाजा संघर्ष जैसी मानवीय संकट स्थितियों का दुरुपयोग कर आतंकी गतिविधियों के लिए धन जुटा रहे हैं।

किशोर के मुताबिक, जैश प्रमुख मसूद अजहर के बेटे हम्माद अजहर और उनके भाई तल्हा अल-सैफ जैसे लोग राहत अपीलों और मस्जिदों के पुनर्निर्माण की आड़ में डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर फंड जुटा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ये नेटवर्क छोटे-छोटे दान (माइक्रो-डोनेशन) और क्रिप्टोकरेंसी के जरिये धन इकट्ठा करते हैं और पहचान से बचने के लिए बिखरे हुए वॉलेट ढांचे तथा अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच लेनदेन (चेन-हॉपिंग) अपनाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस धन का इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकी ढांचे को मजबूत करने में किया गया, जिसमें 300 से अधिक मस्जिदों की स्थापना और उन स्थानों का पुनर्निर्माण शामिल है, जो भारत के 2025 के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान क्षतिग्रस्त हुए थे और जिनका संबंध लश्कर के प्रशिक्षण ठिकानों से रहा है।

रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि मेक्सिको में होने वाली आगामी एफएटीएफ बैठक में अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडलों को पाकिस्तान पर “परिणाम-आधारित मूल्यांकन” अपनाने का दबाव बनाना चाहिए। इसमें निरंतर जांच, सत्यापित संपत्ति जब्ती और आतंकी फंडिंग को सुगम बनाने वाले नेटवर्क के वास्तविक विघटन को केंद्र में रखा जाना चाहिए।
 
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