पटना नीट छात्रा मौत मामला: सियासत तेज, सांसद राजेश वर्मा बोले- बिहार की नीतीश सरकार नहीं बख्शेगी दोषियों को

नीट छात्रा की मौत मामले में बिहार सरकार लगातार कर रही कार्रवाई: सांसद राजेश वर्मा


नई दिल्ली, 30 जनवरी। पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत के मामले ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज कर दी है। इस मामले को लेकर अलग–अलग पक्षों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राजद-कांग्रेस लगातार प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

इसी क्रम में एलजेपी (रामविलास) के सांसद राजेश वर्मा ने कहा कि बिहार सरकार इस प्रकरण को गंभीरता से ले रही है।

सांसद राजेश वर्मा ने कहा कि बिहार सरकार इस प्रकरण को गंभीरता से ले रही है और लगातार कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि मामले में न केवल जरूरी सैंपल एकत्र किए जा रहे हैं, बल्कि संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। जिन व्यक्तियों पर संदेह है और जो दोषी पाए जा रहे हैं, उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस मामले में सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही इस मामले को लटकाने की कोशिश की जा रही है, जिसका कांग्रेस पार्टी विरोध करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की जा रही है और पूरे मामले को दबाने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब छात्रा पटना में रहकर पढ़ाई कर रही थी, तो इसमें परिवार वालों की क्या गलती है, जबकि उसका परिवार जहानाबाद गांव में रहता है?

मामले से जुड़े वकील एसके पांडे ने भी पुलिस जांच पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस अब भी इस मामले को आत्महत्या मानकर चल रही है, जबकि कई सवाल अनुत्तरित हैं। वकील ने मीडिया से अपील की कि वह सीधे डीजीपी से पूछें कि यह मामला आत्महत्या का है या फिर दुष्कर्म से जुड़ा हुआ है और सच्चाई देश के सामने लाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस केस में लीपापोती की जा रही है और पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

एस.के. पांडे ने यह भी कहा कि डीजीपी से उनकी सीधी बातचीत नहीं हो सकी, लेकिन परिवार का कहना है कि पुलिस के शीर्ष अधिकारी अब भी इसे आत्महत्या का मामला मान रहे हैं। उनका आरोप है कि एक साजिश के तहत पूरे केस को आत्महत्या की दिशा में मोड़ा जा रहा है और इसके लिए सबूत व साक्ष्य गढ़े जा रहे हैं। इस पूरे मामले ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि न्यायिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे पीड़ित परिवार और आम जनता में रोष बढ़ता जा रहा है।
 

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