पीके मिश्र बोले: भारत का सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांजिशन मॉडल ग्लोबल साउथ के लिए प्रेरणास्रोत, विकसित भारत की राह साफ

भारत का सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांजिशन मॉडल ग्लोबल साउथ के लिए प्रेरणा: प्रधान सचिव पीके मिश्र


नई दिल्ली, 29 जनवरी। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्र ने गुरुवार को इंटीग्रेटेड रिसर्च एंड एक्शन फॉर डेवलपमेंट (आईआरएडीई) द्वारा आयोजित 'सस्टेनेबल एनर्जी ट्रांजिशन- ग्लोबल पर्सपेक्टिव' विषयक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। डॉ. मिश्र ने अपने संबोधन में स्वच्छ ऊर्जा को विकसित भारत के विजन का मूलभूत हिस्सा बताते हुए कहा कि यह अब केवल ऊर्जा क्षेत्र का एजेंडा नहीं रह गया है, बल्कि यह समग्र विकास, आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता, सामाजिक समावेश और ऊर्जा सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ है।

डॉ. मिश्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडिया एनर्जी वीक के संबोधन का हवाला देते हुए कहा, "एक विकसित भारत का निर्माण स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और सतत जीवनशैली पर होगा।" उन्होंने भारत के ऊर्जा परिवर्तन से दो प्रमुख सबक उजागर किए। पहला, महत्वाकांक्षी लक्ष्य तभी सार्थक होते हैं जब उन्हें मजबूत संस्थागत ढांचा, निरंतर वित्तीय प्रतिबद्धता और लगातार क्रियान्वयन का समर्थन मिले।

उन्होंने बताया कि भारत ने 2030 के लक्ष्य को 2025 तक हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और 100 गीगावाट सौर क्षमता को समय से पहले पूरा कर लिया है, जो नीतिगत निरंतरता और संस्थागत मजबूती का प्रमाण है। दूसरा, ऊर्जा परिवर्तन तब सबसे टिकाऊ होता है जब वह आम लोगों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाए। पीएम-कुसुम योजना से किसानों को राहत मिली। पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना से परिवारों को लाभ और सौर विनिर्माण व इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से उत्पन्न रोजगार के अवसर इस बात को रेखांकित करते हैं कि डीकार्बोनाइजेशन और विकास एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।

डॉ. मिश्र ने ऊर्जा सुरक्षा, सस्ती उपलब्धता और सार्वभौमिक पहुंच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के लिए यह परिवर्तन न्यायसंगत, समावेशी और विकासोन्मुखी होना चाहिए, जिसमें साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियां, राष्ट्रीय परिस्थितियां और निरंतर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मान्यता मिले। भारत ने 2005 से 2020 के बीच जीडीपी की एमिशन इंटेंसिटी 36 प्रतिशत कम की और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को 2030 से नौ साल पहले पूरा कर लिया, जिससे वह पहला जी-20 देश बन गया।

उन्होंने ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण पर प्रकाश डाला। राष्ट्रीय सौर मिशन को 20 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट किया गया, 2016 में टैरिफ नीति में संशोधन, 2018 में जैव ईंधन नीति और 2021 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलें ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा दे रही हैं। हाल ही में परमाणु ऊर्जा को निजी क्षेत्र के लिए खोलना एक ऐतिहासिक कदम है, जो 2047 तक बेसलोड क्षमता बढ़ाएगा। पीएम-कुसुम और बायोफ्यूल प्रोग्राम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं।

डॉ. मिश्र ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा के लाभ सीधे परिवारों तक पहुंचते हैं, जिससे उपभोक्ता ऊर्जा प्रणाली के सक्रिय भागीदार और उत्पादक बन जाते हैं। लगभग 100 प्रतिशत घरेलू विद्युतीकरण और पीएम सूर्य घर योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उजाला एलईडी कार्यक्रम और बिल्डिंग कोड ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देते हैं। लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट मूवमेंट ने व्यवहारिक बदलाव पर जोर दिया। सौर पीवी मॉड्यूल्स के लिए पीएलआई योजना से मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 120 गीगावाट तक पहुंच गई।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) के माध्यम से भारत 112 सूर्य-समृद्ध देशों का नेतृत्व कर रहा है। पंचामृत, समय से पहले लक्ष्य पूरे करना और लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट मूवमेंट ने भारत को वैश्विक जलवायु नेता के रूप में स्थापित किया है। डॉ. मिश्र ने जलवायु न्याय, क्लाइमेट फाइनेंस और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा बढ़ने के साथ ग्रिड स्थिरता के लिए ट्रांसमिशन निवेश और स्टोरेज जरूरी हैं। निकट भविष्य में कोयले की भूमिका बनी रहेगी, लेकिन उत्सर्जन कम करने के प्रयास जारी रहेंगे।

डॉ. मिश्र ने निष्कर्ष में कहा कि भारत का ऊर्जा ट्रांज़िशन मॉडल विकास और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन साधता है, जो ग्लोबल साउथ के लिए प्रेरणा स्रोत है।
 

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
9,226
Messages
9,261
Members
19
Latest member
Jessantict5434
Back
Top