भोपाल/इंदौर, 29 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उपक्षेत्रीय कार्यालय ने शहर में पीएमएलए मामलों के लिए विशेष न्यायालय में राजेश कोठारी के खिलाफ अभियोग दायर किया है।
28 नवंबर, 2025 को दर्ज की गई शिकायत में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 3 के तहत अभियोग की मांग की गई है, जो इसी अधिनियम की धारा 4 के तहत दंडनीय है। आरोपियों को 16 दिसंबर, 2025 को नोटिस जारी किए गए थे। 16 जुलाई, 2011 की एफआईआर और उसके बाद 12 मार्च, 2020 को उज्जैन लोकायुक्त पुलिस के विशेष पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्र के बाद जांच शुरू की गई थी।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ई) और 13(2) के तहत आरोप तय किए गए हैं।
इंदौर नगर निगम में सहायक स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी और रिमूवल अधिकारी सहित विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे राजेश कोठारी पर आरोप है कि उन्होंने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर 2.51 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की है। एजेंसी के एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।
ईडी की जांच से पता चला है कि कोठारी ने भ्रष्टाचार के माध्यम से बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्ति अर्जित की थी। वह इन संपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहे।
जांच से पता चलता है कि कोठारी और उनके परिवार के सदस्यों ने जानबूझकर अपराध की आय अर्जित की, उसे अपने पास रखा, उसका उपयोग किया और उसे छिपाया, और उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने का प्रयास किया।
आगे की जांच में 1.30 करोड़ रुपए मूल्य की दो अचल संपत्तियों की पहचान हुई, जिन्हें कथित तौर पर अपराध की आय से खरीदा गया था। इन संपत्तियों को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है।
अभियोजन शिकायत दर्ज करना राजेश कोठारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भ्रष्टाचार और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए ईडी की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
एजेंसी ने कहा है कि आगे की जांच जारी है, जिससे संकेत मिलता है कि मामले की प्रगति के साथ और भी खुलासे हो सकते हैं।