वित्त मंत्री सीतारमण ने दिया शिक्षा का रिपोर्ट कार्ड: उच्च शिक्षण संस्थानों और प्राथमिक छात्रों की संख्या में बड़ा उछाल

उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में वृद्धि, प्राथमिक शिक्षा में भी बढ़े छात्र: वित्त मंत्री सीतारमण


नई दिल्ली, 29 जनवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की। इस दौरान उन्होंने बताया कि स्‍कूल और उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। वित्त मंत्री ने बताया कि भारत विश्‍व की सबसे बड़ी स्‍कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन कर रहा है।

इसके अंतर्गत 14.71 लाख विद्यालयों में 24.69 करोड़ विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस व्‍यवस्‍था को 1.01 करोड़ से अधिक शिक्षक सहयोग प्रदान कर रहे है। वर्ष 2030 तक प्री प्राइमरी से माध्‍यमिक शिक्षा तक शत प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) हासिल करने के एनईपी लक्ष्‍य के अनुरूप सभी स्‍कूल स्‍तरों पर स्थिर प्रगति देखी गई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों (एचईआई) की संख्‍या 2014-15 में 51,534 थी, जो जून 2025 में बढ़कर 70,018 हो गई। विश्‍वविद्यालयों और कॉलेजों की संख्‍या में महत्‍वपूर्ण वृद्धि से यह संभव हुआ। प्रीमियर उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की संख्‍या में 2014-15 और 2024-25 के बीच महत्‍वपूर्ण वृद्धि हुई है। विद्यार्थियों का नामांकन भी 2021-22 में 4 करोड़ 33 लाख से बढ़कर 2022-23 में 4 करोड़ 46 लाख हो गया।

उन्‍होंने कहा कि समीक्षा के अनुसार शिक्षा क्षेत्र में प्राप्‍त उपलब्धियों में बढ़ी हुई साक्षरता दर, स्‍कूलों और‍ उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में नामांकन में वृद्धि और व्‍यवसायिक शिक्षा के प्रावधान शामिल हैं। पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं ने शिक्षा तक पहुंच और समानता को बढ़ावा दिया है। सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राथमिक स्‍तर पर 90.9, उच्‍च प्राथमिक स्‍तर कक्षा में 90.3, माध्‍यमिक स्‍तर में 78.7 तथा उच्‍च माध्‍यमिक स्‍तर में 58.4 है।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में अब 23 आईआईटी, 21 आईआईएम और 20 एम्‍स हैं। इसके साथ जंजीबार और आबुधाबी में आईआईटी के दो अंतर्राष्‍ट्रीय परिसर शुरू किए गए हैं। एकेडेमिक बैंक और क्रेडिट के दायरे में 2660 संस्‍थानों को लाया गया है। इससे जुड़े 4 करोड़ 60 लाख से अधिक पहचान पत्र जारी किए गए हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत जीईआर का एनईपी लक्ष्‍य हासिल करने के लिए 153 विश्‍वविद्यालयों में प्रवेश और निकास की लचीली व्‍यवस्‍था तथा वर्ष में दो बार प्रवेश की सुविधा दी गई है। भारतीय उच्‍च शिक्षा संस्‍थान प्रतिष्ठित विदेशी विश्‍वविद्यायलों के साथ ट्विनिंग कर रहे हैं। इसके तहत वे संयुक्‍त और ड्यूअल डिग्री प्रदान करेंगे। 15 विदेशी उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के भारत में परिसर स्‍थापित करने की संभावना जताई है।

आर्थिक समीक्षा के अनुसार रोजगार दक्षता जल्‍दी उपलब्‍ध कराने के लिए माध्यमिक स्‍कूलों में व्‍यवस्‍थित कौशल निर्माण की सुविधा दी जा रही है। समीक्षा में बताया गया है कि विशाल मानव संसाधन को पूरी तरह उच्‍च गुणवत्‍ता वाली मानव पूंजी में बदलने के लिए भारत को स्‍कूलिंग के अनुमानित वर्षों को बढ़ाने की आवश्‍यकता है। इस प्रकार तीन से 18 वर्ष की उम्र की स्‍कूलिंग संरचना को एनईपी के 5 प्लस 3 प्लस 3 प्लस 4 के जरिए 15 वर्ष करने की आवश्यकता है। इसके लिए समग्र और ऐसे जीवन चक्र दृष्टिकोण की आवश्‍यकता है जो बच्‍चे की आरंभिक शिक्षा, आधारभूत साक्षरता और संख्याज्ञान (एफएलएन), सार्वभौमिक माध्‍यमिक स्‍कूलिंग और व्‍यवसायिक तथा डिजिटल कौशलों का निर्बाध एकीकरण पर केंद्रित हो।

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है सरकार की विभिन्‍न योजनाओं से जीईआर में महत्‍वपूर्ण सुधार हुआ है। इनमें 33 राज्‍यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 13 हजार 76 पीएमश्री स्‍कूलों की स्‍थापना, उच्‍च गुणवत्‍ता शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुंच के लिए शिशु देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) प्रणाली को एकीकृत और मजबूत करने के लिए 2 लाख 99 हजार 544 स्‍कूलों के साथ ही आंगनवाड़ी केंद्र खोलना शामिल हैं। जादुई पिटारा, ई जादुई पिटारा, किताब एक पढ़े अनेक और भारतीय भाषा पुस्‍तक स्‍कीम जैसी योजनाओं ने बच्‍चों को स्‍थानीय भाषाओं में शिक्षा सामग्री उपलब्‍ध कराई है। भारत ने अवसंरचना और शिक्षक क्षमता को मजबूत करके स्‍कूल नामांकन में महत्‍वपूर्ण प्रगति की है, इसके साथ पोषण शक्ति निर्माण और समग्र शिक्षा अभियान जैसी योजनाएं पहुंच और समानता को प्रोत्‍साहन दे रही हैं।

वित्त मंत्री ने कहा कि माध्‍यमिक स्‍कूलों में व्‍यवस्थित कौशल मार्ग जोड़ने से शिक्षा अधिक प्रासंगिक हो सकती है बशर्ते रोजगार योग्‍य दक्षताएं जल्‍दी उपलब्‍ध हो जाएं व स्‍कूलों को आजीवन शिक्षा केंद्र में बदल दिया जाए।

पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार, 14-18 वर्ष आयु वर्ग के केवल 0.97 प्रतिशत युवाओं को ही संस्‍थागत प्रशिक्षण प्राप्‍त हुआ है, जबकि लगभग 92 प्रतिशत युवाओं को कोई प्रशिक्षण नहीं मिला है। भारत के जनसांख्यिकी लाभांश का लाभ उठाने के लिए इस अंतर को दूर करना अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है। विद्यालयों में कौशल शिक्षा युवाओं को बाजार के अनुरूप कौशल से लैस करेगी, विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में जो औपचारिक रूप से प्रशिक्षित युवाओं के आधे से अधिक को रोजगार प्रदान करता है, साथ ही शिक्षा को आर्थिक अवसरों से जोड़कर विद्यालय छोड़ने वालों की संख्‍या को काम करेगी।

वहीं, यूजीसी और एआईसीटीई द्वारा उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ श्रेणी की शुरुआत की गई है। यह उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में संकाय संसाधनों को बढ़ाने की अनुमति देती है।
 

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