विकसित भारत-2047 की यात्रा में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की महत्वपूर्ण भूमिका: आशीष सूद

विकसित भारत-2047 की यात्रा में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की महत्वपूर्ण भूमिका: आशीष सूद


नई दिल्‍ली, 29 जनवरी। नई दिल्‍ली के विज्ञान भवन में गुरुवार को ओपन, डिस्टेंस, डिजिटल एवं ब्लेंडेड लर्निंग में उभरते रुझानों और चुनौतियों पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ओडीडीबीएल‍-2026 का शुभारंभ हुआ। इस सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए राज्‍य शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि विकसित भारत-2047 की यात्रा में स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस सम्मेलन का आयोजन दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के अंतर्गत डिपार्टमेंट ऑफ डिस्टेंस एंड कंटिन्यूइंग एजुकेशन द्वारा किया जा रहा है। सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, नीति-निर्माता, शिक्षा-नेता, शोधकर्ता और प्रैक्टिशनर भाग ले रहे हैं।

उद्घाटन सत्र की प्रमुख उपलब्धियों में सीओएल रेडियो तथा सीओएल ग्राम ग्रीवेंस पोर्टल का शुभारंभ और सम्मेलन कार्यवाही पुस्तक का विमोचन शामिल रहा। ये पहलें डिजिटल आउटरीच, शिक्षार्थी सहभागिता, प्रौद्योगिकी-आधारित शिकायत निवारण तथा शैक्षणिक शोध के प्रसार के प्रति स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय में कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग के निदेशक प्रो. पायल मागो ने तकनीकी परिवर्तन और बदलती शिक्षार्थी आवश्यकताओं के संदर्भ में ओपन, डिस्टेंस, डिजिटल एवं ब्लेंडेड लर्निंग की बढ़ती प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षा तक पहुंच, गुणवत्ता और शिक्षार्थी सहायता को सुदृढ़ करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर बल देते हुए समावेशी एवं तकनीक-सक्षम शिक्षा के प्रति स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग की प्रतिबद्धता दोहराई।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने शिक्षा नेताओं, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों को संबोधित किया तथा समावेशी, भविष्य-उन्मुख और मानव-केंद्रित शिक्षा के प्रति दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

शिक्षा मंत्री ने ब्रिटिश काउंसिल, इंटरनेशनल काउंसिल फॉर ओपन एंड डिस्टेंस एजुकेशन (आईसीडीई), कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग, दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, संकाय सदस्यों एवं मेधावी विद्यार्थियों सहित सभी विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया।

कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सूद ने कहा कि आज शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय दायित्व है, जहां नीति और दर्शन का संगम होता है, तकनीक और मानवता मिलती है तथा शिक्षा भविष्य की दिशा तय करती है। उन्होंने कहा कि तकनीक शिक्षण-अधिगम में सहायक हो सकती है, परंतु अर्थ और विवेक मानव अनुभव से ही आते हैं। जिम्मेदारी के बिना ज्ञान अधूरा है और विवेक के बिना शक्ति खतरनाक है। यहां होने वाला हर विचार राष्ट्र की सेवा में होना चाहिए।

डिजिटल युग में शिक्षार्थियों की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि लाखों विद्यार्थियों के लिए इंटरनेट, साझा उपकरण और जीवन की व्यावहारिक सीमाएं शिक्षा में बाधा बनती हैं। सरकार का दायित्व है कि सीखना निरंतर, सार्थक और गरिमापूर्ण बना रहे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत सुधार है, जो शिक्षा को रटने से चिंतन की ओर, प्रमाण-पत्रों से क्षमताओं की ओर और केवल पहुंच से सशक्तिकरण की ओर ले जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने डिजिटल युग में ओपन एजुकेशन की खोज नहीं की—हमारी सभ्यता ने हजारों वर्ष पहले विद्या दान की परंपरा के माध्यम से इसे अपनाया था।

आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली के बजट 2025–26 में शिक्षा के लिए 19,291 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो शिक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बजट में सरकारी विद्यालयों में 175 नए कंप्यूटर लैब, 7,000 कक्षाओं के आधुनिकीकरण, तथा एआई-सक्षम तकनीक से फ्रेंच, जर्मन और स्पेनिश सिखाने हेतु 100 डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भाषा प्रयोगशालाओं की स्थापना का प्रावधान है।

उन्होंने शिक्षकों की गरिमा, सीखने की नींव को मजबूत करने और संस्थागत क्षमता निर्माण पर सरकार के विशेष फोकस को रेखांकित किया। दिल्ली सरकार ने शून्य-अपशिष्ट परिसर की शुरुआत की है तथा शिक्षा में हरित एवं सर्कुलर इकॉनॉमी के सिद्धांतों को भी शामिल किया है। उन्होंने कहा कि केवल बुनियादी ढांचा शिक्षा नहीं देता, परंतु कमजोर बुनियादी ढांचा सीखने में बाधा पैदा करता है। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यालयी सुविधाओं का सुदृढ़ होना आवश्यक है।

शिक्षा मंत्री ने वैश्विक संस्थानों से डिजिटल डिवाइड, एआई के युग में अकादमिक ईमानदारी, और तकनीक के कारण सीखने के एकाकी हो जाने जैसी चुनौतियों से संयुक्त रूप से निपटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, हमें ऐसे चिंतक तैयार करने होंगे जो मशीनों का उपयोग करें, न कि ऐसे जो मशीनों से प्रतिस्थापित हो जाएं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि ओपन और डिस्टेंस लर्निंग कोई द्वितीयक विकल्प नहीं, बल्कि भूगोल, आय और परिस्थितियों की सीमाओं से मुक्ति का एक सशक्त माध्यम है, जो बिना दीवारों के सीखने और आजीवन शिक्षा के मार्ग खोलता है।

सूद ने ब्रिटिश काउंसिल और कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग सहित अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’—विश्व एक परिवार है—से प्रेरित होकर नैतिक, समावेशी और मानव-केंद्रित वैश्विक डिजिटल शिक्षा ढांचे के निर्माण में भारत के साथ सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘आइए हम ऐसा भारत बनाएं जहाँ ज्ञान सुलभ हो, सीखना मानवीय हो और भविष्य साझा हो।’

इस अवसर पर प्रो. योगेश सिंह, कुलपति, दिल्ली विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा तक पहुंच के विस्तार और आजीवन अधिगम को बढ़ावा देने में डिजिटल नवाचार, ब्लेंडेड लर्निंग और एआई-सक्षम प्रणालियों की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षण, मूल्यांकन, अधिगम और शिक्षार्थी सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए की जा रही पहलों का उल्लेख किया।
 

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