सीएम भूपेंद्र पटेल ने द्वारकाधीश के चरणों में नवाया शीश, गुजरात की जनता के लिए की सुख-समृद्धि की मंगल कामना

गुजरात : सीएम भूपेंद्र पटेल ने किए भगवान द्वारकाधीश के दर्शन, प्रदेश की जनता के लिए सुख-समृद्धि की कामना


गांधीनगर, 29 जनवरी। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को द्वारका में भगवान द्वारकाधीश के चरणों में शीश नवाकर दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने भगवान द्वारकाधीश के श्री चरणों में प्रदेश के नागरिकों की सुख-शांति और समृद्धि की हृदयपूर्वक प्रार्थना की। उन्होंने भक्तिभाव से शास्त्रोक्त विधिपूर्वक पादुका पूजन भी किया।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में उपस्थित दर्शनार्थियों का अभिवान स्वीकार किया और सभी को ‘जय द्वारकाधीश’ कहा।

जिला प्रशासन ने सीएम भूपेंद्र पटेल को अंगवस्त्र, द्वारका मंदिर की प्रतिकृति, फूल और तुलसी से बनी अनुग्रहम अगरबत्ती तथा प्रसाद अर्पित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ पूर्व मंत्री और विधायक मुळुभाई बेरा, जिला कलेक्टर राजेश तन्ना, पुलिस अधीक्षक जयराजसिंह वाळा और अग्रणी मयूरभाई गढ़वी सहित स्थानीय पदाधिकारी मौजूद रहे।

इससे पहले सीएम भूपेंद्र पटेल गिर पहुंचे और साथ ही वहां के लोगों, पर्यटकों और दुकानदारों से बातचीत भी की। उन्होंने लोकल प्रोडक्ट बेचने वाले स्टॉल देखे, जिसमें गिर इलाके की आम से बनी चीजें और शेरों वाली हैंडीक्राफ्ट शामिल थीं। अधिकारियों ने बताया कि सीएम ने स्टूडेंट्स और महिलाओं से भी बातचीत की और एक चाय की दुकान पर लोगों के साथ समय बिताया।

गुरुवार सुबह, मुख्यमंत्री ने गिर नेशनल पार्क में जंगल सफारी की। फॉरेस्ट अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने एशियाई शेरों और दूसरे जंगली जानवरों को उनके नेचुरल हैबिटैट में देखा और केराम्बा थाना इलाके का दौरा किया, जहां शेर दो अलग-अलग जोन में देखे गए। अनुमान के मुताबिक, अभी 891 एशियाई शेर गिर और सौराष्ट्र के दूसरे शेर वाले इलाकों में रहते हैं।

सफारी के बाद, सीएम पटेल ने सासन गिर में 183 खास इक्विप्ड गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई, जो गिर, बड़े गिर लैंडस्केप और राज्य के दूसरे जंगली इलाकों में तैनात फॉरेस्ट स्टाफ के लिए थीं। इन गाड़ियों का मकसद वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन, कंजर्वेशन, रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन ऑपरेशन को मजबूत करना है।

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने कहा कि फ्लीट में 174 फील्ड मोटरसाइकिल, छह बोलेरो कैंपर गाड़ियां और तीन मॉडिफाइड रेस्क्यू गाड़ियां हैं, जिनका इस्तेमाल जंगल के इलाकों में पेट्रोलिंग, प्रोटेक्शन ड्यूटी और रेस्क्यू काम के लिए किया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि इस अलॉटमेंट का मकसद फील्ड मोबिलिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बेहतर बनाना है, खासकर दूर-दराज और सेंसिटिव वाइल्डलाइफ जोन में।
 

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