पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन मानवीय मदद के नाम पर जुटा रहे फंड: रिपोर्ट

पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन मानवीय मदद के नाम पर जुटा रहे फंड: रिपोर्ट


वॉशिंगटन, 28 जनवरी। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान स्थित इस्लामी आतंकी संगठन अपने फंड जुटाने के तरीकों में लगातार विविधता ला रहे हैं और वैश्विक निगरानी से बचने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। ये संगठन मानवीय गतिविधियों, मस्जिदों, राहत-बचाव अभियानों और युद्धों का सहारा लेकर अमेरिका समेत दुनिया भर में धन इकट्ठा कर रहे हैं, साथ ही “उग्र इस्लामी संदेश” फैलाकर आतंकी गतिविधियों को मजबूत कर रहे हैं।

अमेरिकी मीडिया संस्थान पीजे मीडिया के लिए लिखते हुए तुर्की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने कहा, “आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में पाकिस्तान का रिकॉर्ड संदिग्ध रहा है। उसने कई बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह किया है और अब तक ऐसे ठोस संस्थागत कदम नहीं उठाए हैं, जो आतंकी फंडिंग और धन शोधन पर प्रभावी अंकुश लगा सकें।”

रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद गाजा के लिए राहत सहायता के नाम पर धन जुटा रहा है। बुलुत ने लिखा कि जैश प्रमुख मसूद अजहर का बेटा हम्माद अजहर गाजा सहायता के बहाने आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने की मुहिम का नेतृत्व कर रहा है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि हम्माद अजहर गाजा की महिलाओं से अपने तथाकथित ‘दान कार्यों’ की तारीफ करते हुए वीडियो बनवाता है। सोशल मीडिया पर वह ‘क़ैसर अहमद’ नाम से सक्रिय है और लोगों से ‘खालिद अहमद’ के नाम से दर्ज एक ईज़ीपैसा खाते में दान देने की अपील करता है। बताया गया है कि उसे पाकिस्तान और खाड़ी देशों से चंदा मिल रहा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जैश-ए-मोहम्मद ने फंड जुटाने का एक और तरीका अपनाया है- मस्जिद निर्माण। कथित तौर पर संगठन ने पाकिस्तान में 300 से अधिक मस्जिदों के निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर चंदा अभियान शुरू किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया कि जैश ने डिजिटल वॉलेट्स के जरिए 313 नए मरकज़ (केंद्रीय भवन) बनाने के लिए 3.91 अरब पाकिस्तानी रुपये (लगभग 1.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर) जुटाने का ऑनलाइन अभियान चलाया।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक अन्य आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भी वैश्विक निगरानी से बचने के लिए बैंक खातों की जगह सीधे डिजिटल वॉलेट्स के जरिए फंड जुटाना शुरू कर दिया है, ताकि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स जैसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया कि इन आतंकी संगठनों को संचालित करने वाली विचारधारा का अंतिम लक्ष्य इस्लामी देशों का एक वैश्विक खिलाफत स्थापित करना है, जिसका उद्देश्य गैर-मुस्लिम देशों पर वर्चस्व कायम करना और शरीयत कानून लागू करना है।
 
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