इस्लामाबाद, 28 जनवरी। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में असहमति को दबाकर और प्रमुख वैश्विक शक्तियों की अस्थायी सहानुभूति हासिल कर बनाई गई आंतरिक स्थिरता की छवि बेहद नाजुक है। हाइब्रिड शासन व्यवस्था अब भी जनता का भरोसा हासिल करने में विफल रही है और व्यवस्था में बना हुआ “व्यवस्था का भ्रम” अपने ही पतन के बीज समेटे हुए है।
ईस्ट एशिया फोरम के लिए लिखते हुए इस्लामाबाद स्थित सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के कार्यकारी निदेशक इम्तियाज गुल ने कहा कि वर्ष 2025 में पाकिस्तान में सैन्य शक्ति का निर्णायक रूप से सुदृढ़ीकरण हुआ। उन्होंने लिखा कि पहले जिस हाइब्रिड सिस्टम में नागरिक राजनेता सामने रहते थे और वास्तविक सत्ता सेना के पास होती थी, वह अब खुली सैन्य प्रधानता में बदल चुका है।
इम्तियाज गुल के अनुसार, “कई पाकिस्तानियों के लिए 2025 लोकतंत्र के और क्षरण का वर्ष साबित हुआ। न्यायपालिका और कमजोर हुई, संसद की ताकत घटी और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका महज आज्ञाकारी बनकर रह गई। फरवरी 2024 के विवादित चुनावों के बाद गठित नेशनल असेंबली के अधिकांश सदस्य सैन्य प्रतिष्ठान के बेहद करीब नजर आए। कई विधायी कदमों के जरिए नागरिक संस्थाओं से अधिकारों का हस्तांतरण सशस्त्र बलों की ओर औपचारिक रूप से किया गया, जहां लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा की बजाय ‘स्थिरता’ को प्राथमिकता दी गई।”
रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाक्रमों से पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का हाशियाकरण और गहरा हुआ। अगस्त 2023 से कथित रूप से “राजनीतिक प्रेरित” आरोपों में हिरासत में रखे गए इमरान खान की गिरफ्तारी ने देश में आंतरिक अशांति को और बढ़ाया।
रिपोर्ट में कहा गया कि डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी से कई महीने पहले इमरान खान के समर्थकों ने अमेरिकी रिपब्लिकन सांसदों ऑगस्ट फ्फ्लूगर, जो विल्सन और जैक बर्गमैन के साथ-साथ ट्रंप के करीबी सहयोगी रिचर्ड ग्रेनेल से भी खान की रिहाई के लिए पैरवी की थी। हालांकि, बाद के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों ने इन प्रयासों को निष्फल कर दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, इमरान खान की हिरासत को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी रही। दिसंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र की यातना मामलों की विशेष दूत एलिस जिल एडवर्ड्स ने अदियाला जेल में कथित अमानवीय हालात, जिनमें लंबे समय तक एकांत कारावास भी शामिल है, को लेकर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी।
पाकिस्तान की नागरिक-सैन्य नेतृत्व को तब अंतरराष्ट्रीय ध्यान मिला, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को अपना “पसंदीदा फील्ड मार्शल” बताया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस गर्मजोशी ने इमरान खान समर्थकों की उन उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया कि बाहरी दबाव से उनकी रिहाई संभव हो पाएगी। गौरतलब है कि अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद से इमरान खान पर 180 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि 2025 की घटनाएं दर्शाती हैं कि किस तरह रणनीतिक सुविधा के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि आसानी से चढ़ा दी जाती है। अमेरिका की चीन और रूस के साथ बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच, सैन्य नेतृत्व वाला पाकिस्तान वॉशिंगटन की प्राथमिकताओं के साथ खुद को जोड़ता नजर आया।
रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक कारणों से पाकिस्तान की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और मानवाधिकार रिकॉर्ड पर वैश्विक निगरानी भी कमजोर पड़ी।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई, “पाकिस्तान में, जहां असंतोष बार-बार उबाल पर आ जाता है, अल्पकालिक व्यवस्था अंततः कहीं अधिक गहरे और खतरनाक अव्यवस्था की भूमिका बन सकती है।”