उत्तर प्रदेश: ‘एआई मंथन-2026’ का समापन, राज्यपाल ने एआई को उच्च शिक्षा का भविष्य बताया

उत्तर प्रदेश: ‘एआई मंथन-2026’ का समापन, राज्यपाल ने एआई को उच्च शिक्षा का भविष्य बताया


लखनऊ, 28 जनवरी। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में आयोजित दो दिवसीय ‘एआई मंथन-2026: उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में एआई की चुनौतियां और संभावनाएं’ विषयक कार्यशाला का बुधवार को समापन हो गया।

प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बदलते दौर में एआई को अपनाना समय की आवश्यकता है। समय का सदुपयोग और संसाधनों का प्रभावी उपयोग ही वास्तविक उपलब्धि है।

राज्यपाल ने कहा कि एआई का सकारात्मक उपयोग शिक्षा, शोध, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासन में सटीकता व पारदर्शिता बढ़ा सकता है। हालांकि, इसके दुरुपयोग की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए विद्यार्थियों को एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। गलत उपयोग करने वालों के लिए सख्त प्रावधान भी होने चाहिए।

उन्होंने बजट प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि बजट आने के बाद केवल चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना जरूरी है कि किस क्षेत्र को क्या मिला है और उसका उपयोग कैसे किया जाए। विश्वविद्यालयों को पहले से ठोस और व्यावहारिक प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्र एवं राज्य सरकार के बजट से आधिकाधिक फंड प्राप्त करने की दिशा में सक्रिय होना होगा।

राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शोध और अनुसंधान की अपार संभावनाएं हैं। एआई की सहायता से पुस्तकों का अनुवाद, बहुविषयक शोध और विभागीय समस्याओं के समाधान के लिए अध्ययन कार्य किए जा सकते हैं। शोध की कोई सीमा नहीं होती। आवश्यकता सामूहिक प्रयास और स्पष्ट लक्ष्य की है। उन्होंने विशेष रूप से गरीब और संसाधनहीन बच्चों को एआई के माध्यम से शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि एआई को सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बनाना होगा ताकि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम पायदान तक पहुंच सके। शिक्षक-छात्र संबंधों में ईमानदारी और पवित्रता बनाए रखना भी आवश्यक है। दो दिनों तक चली इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि एआई आज की आवश्यकता है और भविष्य में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा की दिशा तय करेगा।

तकनीकी सत्रों में परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्र निर्माण, लैब प्रैक्टिकल, स्वास्थ्य, शोध और प्रशासन में एआई के उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। आईबीएम, आईआईटी कानपुर, इग्नू सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने जेनरेटिव एआई, कंप्यूटर विज़न, सॉवरेन एआई और एआई आधारित सरकारी परियोजनाओं की जानकारी साझा की।

पैनल डिस्कशन में राज्य विश्वविद्यालयों में एआई के लिए कंप्यूटेशन सुविधाएं विकसित करने, शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और शोध के लिए सरकारी फंड एवं फेलोशिप प्राप्त करने के उपायों पर मंथन हुआ। विभिन्न विश्वविद्यालयों ने एआई कोर्स, स्टार्टअप और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण से जुड़े अनुभव साझा किए।

विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ. पंकज एल. जानी ने कहा कि यह एआई मंथन प्रदेश की उच्च शिक्षा में परिवर्तन की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा। कार्यक्रम में चयनित स्टार्टअप्स को राज्यपाल द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान ऑनलाइन माध्यम से प्रदेश के 300 से अधिक स्थानों से तीन हजार से अधिक शिक्षक और छात्र कार्यक्रम से जुड़े रहे।
 

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