'अमेरिका फर्स्ट' नीति पर दुनिया का फूटा गुस्सा: CGTN सर्वे में 90% ने अमेरिकी वर्चस्ववादी रवैये को नकारा

सीजीटीएन सर्वे : अमेरिकी वर्चस्ववादी कूटनीति वैश्विक शासन व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ा रही


बीजिंग, 28 जनवरी। 'अमेरिका फर्स्ट' विदेश नीति ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में व्यापक चिंता पैदा कर दी है। सीजीटीएन द्वारा वैश्विक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 90.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वैश्विक शासन में अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से इनकार करते हुए अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व हासिल करने की चाहत रखने के लिए अमेरिका की निंदा की है और इसे वर्चस्ववादी कूटनीति का स्पष्ट प्रतिबिंब माना है।

आलोचनाओं और विरोध प्रदर्शनों के बीच, अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन और पेरिस समझौते से खुद को अलग कर लिया।

सर्वेक्षण में, 57.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिका के इस कदम का सार्वजनिक स्वास्थ्य और जलवायु शासन जैसे वैश्विक मुद्दों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा, अमेरिका पर अभी भी विश्व स्वास्थ्य संगठन का 26 करोड़ डॉलर का बकाया है और 81.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अमेरिका से इस बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने का आग्रह किया है।

2026 से, अमेरिका ने जलवायु शासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, शरणार्थी और सतत विकास सहित वैश्विक शासन के कई क्षेत्रों को कवर करने वाले विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से खुद को अलग कर लिया है।

सर्वेक्षण में, 83.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वैश्विक शासन के प्रति अमेरिका के निष्क्रिय रवैये की आलोचना करते हुए इसे एक "गैर-जिम्मेदार प्रमुख शक्ति" बताया, जबकि 85.3 प्रतिशत का मानना है कि "अमेरिका फर्स्ट" नीति ने अमेरिका की राष्ट्रीय छवि और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
 

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