भारत-ईयू एफटीए बना गेमचेंजर: विशेषज्ञों ने कहा, यह समझौता दिलाएगा अन्य व्यापार समझौतों में भी रणनीतिक बढ़त

भारत-ईयू एफटीए से देश को अन्य द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट में बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी: एक्सपर्ट्स


नई दिल्ली, 28 जनवरी। भारत-ईयू ट्रेड समझौते से देश को अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए चल रही बातचीत में बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी। यह बयान बुधावर को एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के पूर्व चेयरमैन महावीर प्रताप ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए से देश के निर्यात में बढ़त देखने को मिलेगी। यह एग्रीमेंट ऐसे समय पर हुआ है, जब अमेरिका व्यापार को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इससे भारत को आने वाले द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट में बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के बाद यूरोप सबसे बड़ा विकसित बाजार है और लेदर, कपड़ा और अन्य अधिक श्रम उपयोग वाले क्षेत्रों से होने वाले निर्यात पर आयात शुल्क शून्य होने से देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इंडियन कॉफी रोस्टर्स एसोसिएशन के श्रीकांत राव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि भारत-ईयू एफटीए एक बहुत बड़ा समझौता है। यूरोप भारतीय कॉफी का सबसे बड़ा बाजार है। इस तरह के समझौते से निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

उन्होंने आगे कहा कि एफटीए का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे कारोबारी लंबी अवधि के नजरिए से मशीन और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स में निवेश कर पाएंगे।

तिरुपुर एक्सपोर्ट एसोसिएशन के के.एम. सुब्रमणियन ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि करीब 20 वर्षों की बातचीत के बाद यह एफटीए हुआ है। हम इसका स्वागत करते हैं। तिरुपुर से 45,000 करोड़ रुपए के अपैरल का निर्यात होता है, जिसमें यूरोप के इन 27 देशों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। हमें लगता है कि जब यह समझौता लागू होगा, तो निर्यात में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि पहले ही साल में हो सकती है।

भारत-ईयू ट्रेड डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है, क्योंकि भारत-ईयू की विश्व की जीडीपी में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है और इसका असर करीब 2 अरब लोगों पर होगा।
 

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